
*खाद की कालाबाजारी का आरोप, महंगे दाम पर बिक्री से किसानों में आक्रोश*
*खाद की कालाबाजारी का आरोप, महंगे दाम पर बिक्री से किसानों में आक्रोश*
•~ सरकारी दर पर खाद न मिलने से अन्नदाता परेशान, शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर उठे सवाल
•~ निजी दुकानदारों पर अधिक कीमत वसूलने और रसीद नहीं देने का आरोप, किसानों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा/सोनभद्र। सरकार की ओर से किसानों को समय से और उचित दर पर रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने के दावों के बीच जमीनी हकीकत अलग नजर आ रही है। किसानों का आरोप है कि निजी खाद विक्रेताओं द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में किसानों को खाद खरीद की रसीद भी नहीं दी जा रही है। इससे अन्नदाताओं में क्षोभ और नाराजगी व्याप्त है।
घोरावल विकास खंड के ढुटेर गांव निवासी प्रगतिशील किसान रघुनाथ प्रसाद ने बताया कि निजी दुकानदारों द्वारा रासायनिक उर्वरकों की अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत उन्होंने जिला कृषि अधिकारी से की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसान के मुताबिक जिम्मेदार अधिकारी की ओर से यह जवाब दिया गया कि “ऊंचे दाम पर कहीं खाद नहीं बिक रही है।” इस जवाब ने किसानों की परेशानी को और गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है।
*शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, किसानों ने मांगी जांच*
रघुनाथ प्रसाद ने शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराई जाए तो खाद बिक्री की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।उन्होंने किसानों के हित में निजी दुकानों के साथ-साथ साधन सहकारी समितियों पर भी खाद वितरण की व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाने की मांग की है।
*समितियों पर लाइन, मजबूरी में निजी दुकानों का सहारा*
कई किसानों से बातचीत में यह बात सामने आई कि साधन सहकारी समितियों पर डीएपी और यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें समय से खाद नहीं मिल पाती। किसानों का कहना है कि नंबर आने में कई दिन लग जाते हैं और खाद लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है।फसल की जरूरत और समय की मजबूरी के चलते किसान आखिरकार निजी दुकानों का रुख करने को मजबूर हो जाते हैं, जहां उनके अनुसार निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है।
*‘फार्मर आईडी और आधार की व्यवस्था का क्या लाभ?’*
किसानों का सवाल है कि खाद वितरण में फार्मर आईडी और आधार जैसी व्यवस्थाएं लागू होने के बावजूद यदि उन्हें खुले बाजार में अधिक कीमत देकर खाद खरीदनी पड़ रही है तो इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है?किसानों ने मांग की है कि खाद की कीमत, बिक्री की रसीद, स्टॉक और वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को निर्धारित दर पर समय से खाद मिल सके।किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी होती जा रही है। ऐसे में खाद जैसी जरूरी कृषि सामग्री के लिए अतिरिक्त रकम देना अन्नदाताओं पर दोहरी मार है।
*अब देखना यह है कि किसानों की शिकायत पर जिम्मेदार विभाग कब तक प्रभावी कदम उठाता है।*











