*वन-बंधुओं की जिंदगी से खिलवाड़,झोलाछापों का बढ़ता जाल,सेहत पर मंडरा रहा खतरा! कब गिरेगी कार्रवाई की गाज?*

*वन-बंधुओं की जिंदगी से खिलवाड़,झोलाछापों का बढ़ता जाल,सेहत पर मंडरा रहा खतरा! कब गिरेगी कार्रवाई की गाज?*
~ बिना पंजीकरण के चल रहे हैं क्लीनिक,पैथोलॉजी व मेडिकल स्टोर, रंग -बिरंगी गोलियों के सहारे इलाज
•~ क्लीनिक से पैथोलॉजी तक सवालों के घेरे में व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

गुरमा-सोनभद्र। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार समेत मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बीच सलखन न्याय पंचायत क्षेत्र में कथित झोलाछाप चिकित्सकों, निजी जांच केंद्रों और मेडिकल स्टोरों के संचालन को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और वैध पंजीकरण के बिना इलाज एवं जांच का काम किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक गुरमा मोड, मारकुंडी,मकरीबारी, मीनाबाजार, बेलछ, रुदौली, सलखन, पटवध, कुरूहुल, मीतापुर, करगरा, रजधन और पइका सहित आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर निजी तौर पर मरीजों का उपचार और जांच की जा रही है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मरीजों से विभिन्न जांचों के नाम पर शुल्क लिया जाता है, जबकि संबंधित संस्थानों के पंजीकरण तथा जांच करने वाले कर्मियों की योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
*गरीब और आदिवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका*
ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर तथा दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवार तत्काल उपचार के लिए नजदीकी कथित चिकित्सकों और मेडिकल दुकानों का सहारा लेते हैं। आरोप है कि कई बार मरीजों को अलग-अलग दवाएं और जांच लिखी जाती हैं, जिससे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सामान्य बीमारी गंभीर रूप लेने पर मरीजों को बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्राथमिक स्तर पर मरीजों को किस योग्यता और व्यवस्था के आधार पर उपचार दिया जा रहा है।
*बिना पंजीकरण क्लीनिक- पैथोलॉजी पर हो तत्काल कार्रवाई*
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सलखन न्याय पंचायत क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। सभी निजी क्लीनिकों, पैथोलॉजी केंद्रों और मेडिकल स्टोरों के पंजीकरण, लाइसेंस, संचालकों की योग्यता तथा जांच करने वाले तकनीकी कर्मियों की वैध योग्यता का सत्यापन कराया जाए।यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
*शिकायत मिलते ही दुकान बंद होने का भी आरोप*
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कथित संचालकों को जांच अथवा शिकायत की भनक लगते ही प्रतिष्ठान बंद कर देने की बात सामने आती है। इससे मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच करना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित और औचक निरीक्षण भी करे।
*स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से बिना पर्याप्त दस्तावेजों के चिकित्सा सेवाएं संचालित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा नियमित सत्यापन और निरीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा है?ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सलखन न्याय पंचायत क्षेत्र में तत्काल व्यापक अभियान चलाकर संदिग्ध चिकित्सा प्रतिष्ठानों की जांच कराई जाए। जांच में अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा वैध पंजीकरण और आवश्यक योग्यता वाले संस्थानों की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और अधिकृत स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिल सके।
*अब कार्रवाई का इंतजार*
मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रभाव के बीच ग्रामीणों की शिकायत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी और मजबूरी का फायदा उठाकर यदि कहीं नियमों के विपरीत उपचार या जांच की जा रही है तो उस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर कब तक धरातल पर जांच और कार्रवाई शुरू करता है।


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