
*टूटी-फूटी क्षतिग्रस्त जाम बदहाल नालियां,फैला रही है दुर्गंध,दे रही है संक्रामक रोगों को खुला निमंत्रण*
*टूटी-फूटी क्षतिग्रस्त जाम बदहाल नालियां,फैला रही है दुर्गंध,दे रही है संक्रामक रोगों को खुला निमंत्रण*
•~ गुरमा,मारकुंडी,सलखन में नहीं दिख रहा संचारी रोग नियंत्रण माह अभियान का असर,गांवों में पूरी तरह ठप है सफाई व्यवस्था
डेंगू,मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियां फैलने की है प्रबल संभावना
•~ संबंधितों के दरबान बने हैं सफाई कर्मी,हाजी मस्टरोल के सहारे सरकार से बैठ कर ले रहे हैं प्रतिमाह तनख्वाह
अवधेश कुमार गुप्ता
गुरमा-सोनभद्र। जनपद में जहां एक तरफ स्वच्छता अभियान तथा संक्रामक रोगों पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से संचारी रोग नियंत्रण माह अभियान चलाया जा रहा है वहीं पर दूसरी तरफ सदर विकासखंड के गुरमा, मारकुंडी,सलखन ग्राम पंचायत मे बनी नालियां टूटी फूटी क्षतिग्रस्त जाम बदहाल पड़ी दुर्गंध फैलाते हुए संक्रामक रोगों को खुला निमंत्रण दे रही है। आलम यह है कि आधा नालियां टूटकर बिखर गई है तथा गंदगी से पूरी नाली पट गई है जिससे आने-जाने वाले राहगीरों समेत रहवासियों का जीना दुश्वार सा हो गया है जबकि इस संबंध में ग्रामीणों ने संबंधितों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया लेकिन इस दिशा में कोई सार्थक पहल आज तक नहीं की गई इससे ग्रामवासियों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
इस संबंध में बताते हैं कि जनपद में 1अक्टूबर से लेकर 31अक्टूबर तक महा अभियान चलाकर साफ सफाई कर स्वच्छता अभियान तथा संक्रामक रोग पर नियंत्रण को लेकर संचारी रोग अभियान चलाया जा रहा है वही जिम्मेदार लोग इस अभियान में सहभागिता निभाने से परहेज करते हुए अपने जिम्मेदारियां से मुंह में लिए है।संचारी माह अभियान का असर गांवो मे नही दिख रहा है। सदर ब्लाक के सलखन बाजार व सलखन से बेलछ रुदौली जाने वाले मार्ग पर नाली बनाई गई है।आधा टूटकर बिखर गई है। गन्दगी से पूरी नाली पट गई है चहूंओर गंदगी का साम्राज्य है।
गांव के रोड एवं सार्वजनिक स्थलों पर कचड़ा पडा हुआ है।गांव मे सफाई करने के लिए कभी भी सफाई कर्मी नही आ रहे है। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि सफाई कर्मी कौन- कौन से लोग है?ग्रामीणो को यह भी जानकारी नही है। ग्रामीणो का कहना है कि कई महीनो से नाली की साफ-सफाई नही हुआ है। जिससे यह पूरी तरह से जाम हो चुकी है। नाली व गांव की गलियो मे घास-फूस जम गई है और 2025 मे नाली बनाई गई थी जो जिला पंचायत के तहत बनाई गई नाली टुट कर बिखर गई है। ठेकेदार ने अवई छठ घाट बनाए है वह भी अधूरा छोड़कर चले गये।वही नाली निर्माण का कार्य आधा अधूरा छोड़कर गायब हो गए।मार्च का महीना था उसी समय काम लगाकर आधा काम दिखाकर बीच मे ही छोड़कर भाग गये।उसके बाद ठेकेदार का कोई अता पता नही चला। गांवों को स्वच्छ रखने के लिए सरकार ने सफाई कर्मियों की तैनाती की थी, लेकिन हकीकत इसके उलट है।हालात यह हैं कि गांवों में नालियां
जाम हैं, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़े का ढेर लगा है। पंचायत भवन, स्कूल, एएनएम सेंटर और शौचालयों के आसपास गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है। वही गुर्मा मोड़ मारकुंडी स्थित आटो स्टैंड मुख्य तिराहे के पास लगे सरकारी हैंड पंप के इर्द-गिर्द काफी गंदगी तथा कूड़ा करकट एकत्रित है।ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मी गांव में आते ही नहीं।कई तोअपने गांव के सफाई कर्मियों को पहचानते तक नहीं। सफाई करने के बजाय ये कर्मचारी
संबंधितों के घर पर ही हाजिरी लगाते रहते है। वहीं गुरमा, मारकुंडी,सलखन समेत कई गांवों की गलियों और नालियों में कूड़ा व कीचड़ जमा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। गांव के लोगो ने बताया कि गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। सफाई कर्मियों को कभी गांव में देखा तक नहीं गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की है।











