ओबरा सेवा भाव के साथ 19वें शनिवार भी जारी रहा खिचड़ी का प्रसाद, जरूरतमंदों को बांटे गए कंबल

ओबरा सेवा भाव के साथ 19वें शनिवार भी जारी रहा खिचड़ी का प्रसाद, जरूरतमंदों को बांटे गए कंबल

सोनभद्र (विनोद मिश्रा/सेराज अहमद)

जनपद के औद्योगिक नगर ओबरा में मानवता और सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की जा रही है। सुभाष चौराहा स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में श्री राम सेवा समिति के तत्वाधान में प्रत्येक शनिवार को आयोजित होने वाला खिचड़ी भंडारा अब निरंतरता के साथ अपने 19वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस शनिवार, समिति ने कड़ाके की ठंड को देखते हुए भोजन के साथ-साथ कंबल वितरण का पुनीत कार्य भी संपन्न किया।

*परिवर्तन का संकल्प खुद बदलो, देश बदलेगा*

समिति का मुख्य उद्देश्य केवल भोजन कराना ही नहीं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक वैचारिक क्रांति लाना है। समिति के सदस्यों का मानना है कि आइए मिलकर परिवर्तन लाएं, एक कदम बेहतर भविष्य की ओर। यदि हम खुद को बदलेंगे तो समाज बदलेगा, और जब समाज बदलेगा तो देश स्वतः ही बदल जाएगा। इसी मूल मंत्र के साथ समिति के सदस्य निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटे हुए हैं। इस साप्ताहिक सेवा कार्य के मुख्य आयोजक पत्रकार अजीत सिंह हैं। उनके इस नेक कार्य में क्षेत्र के कई संभ्रांत नागरिकों और सहयोगियों ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में निम्नलिखित सदस्यों का विशेष योगदान रहा ओम प्रकाश सिंह, संकट मोचन झा, सर्वेश दुबे। महिला शक्ति सरिता सिंह, पुष्पा दुबे, रीता कुमारी। समिति सदस्य बाबूलाल, राजू श्रीवास्तव, पंकज गौतम, रणजीत तिवारी। श्री बाबूराम सिंह शनिवार को आयोजित इस 19वें भंडारे में राहगीरों और स्थानीय जरूरतमंदों ने उत्साहपूर्वक खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही, भीषण ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए निर्धन और असहाय लोगों को कंबल वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर खुशी देखी गई। समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया कि सेवा का यह क्रम भविष्य में भी इसी तरह अनवरत जारी रहेगा ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मदद पहुँच सके।इस अवसर पर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध समाजसेवी और युवाओं के प्रेरणास्रोत आनंद पटेल ‘दयालु’ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से श्रद्धालुओं और राहगीरों को प्रसाद वितरित किया और समिति के इस सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ही सच्ची मानवता है।


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