*सलखन नशा मुक्ति केंद्र में दुर्व्यवस्थाओं का बोलबाला,सरकारी धन के लूट-खसोट का बना अड्डा*

*सलखन नशा मुक्ति केंद्र में दुर्व्यवस्थाओं का बोलबाला,सरकारी धन के लूट-खसोट का बना अड्डा*
•~ व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश पर फंसाने की साजिश रच करते हैं पुरजोर कोशिश
•~केंद्र के कार्यों की करायी जाय उच्चस्तरीय जांच तो दूध का दूध और होगा पानी का पानी

*अवधेश कुमार गुप्ता/बीपी गौतम*
सोनभद्र। रावर्ट्सगंज विकासखंड के सलखन नशा मुक्ति केंद्र में दुव्यवस्थाओं का बोलबाला है तथा सरकारी धन में तमाम अनियमितताएं बरतते हुए जमकर लूट-खसोट एवं बंदरबांट किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
बताते हैं कि सलखन न्याय पंचायत क्षेत्र,15 ग्राम पंचायतों का एक न्याय पंचायत क्षेत्र है।ज्यादातर ग्राम पंचायत सुदूरवर्ती पहाड़ी आदिवासी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति,पिछड़ा बाहुल्य क्षेत्र है।ज्यादातर यहां के रहवासी अशिक्षित तथा बेरोजगार हैं और अशिक्षा एवं अज्ञानता के वशीभूत होकर ज्यादातर युवा ग्रामीण नशे से प्रभावित होकर नशा रूपी दलदल में धंसते चले जा रहे हैं। इसके रोकथाम के लिए शासन प्रशासन प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर काफी पहल कर अस्पताल,संस्थाएं आदि खोल रखी है जिससे की नशा मुक्ति पर प्रतिबंध लग सके तथा नशा से लोगों को छुटकारा मिल सके। इसी क्रम में विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि सलखन ग्राम पंचायत में एक तथाकथित संस्था द्वारा नशा मुक्ति केंद्र खोला गया है जहां पर तमाम दुव्यवस्थाओं का बोलबाला है तथा सरकारी धन में तमाम अनियमितताएं बरतते हुए बंदरबांट किए जा रहा है। यहां पर कर्मचारी के नाम पर चार कर्मचारी जिनमें दो पुरुष तथा दो महिलाएं ही वर्तमान समय में मौजूद है जिन्हें संस्था द्वारा तकरीबन 5-6 माह से वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है।यहां हमेशा कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।वर्तमान में मरीजों की संख्या महज चार ही है। सभी बेड खाली पड़े हुए हैं मरीज एवं संस्था का देखभाल करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है।
सूत्रों की माने तो जनपद में किसी भी उच्चाधिकारियों, पदाधिकारियों, निरीक्षण अधिकारियों दौरा निरीक्षण होता है तो केंद्र पर मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।सब व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त कर दी जाती हैं ताकि कहीं से भी कोई कमियां या खामियां नजर न आ सके तथा तमाम कागजी खानापूर्ति सुव्यवस्थित कर ली जाती है ताकि निरीक्षण के दौरान निरीक्षणकर्ता संतुष्टि जताते हुए सराहना कर सके। जांच दल के जाते ही व्यवस्था पुनः जस की तस हो जाती है। तथा केंद्र तमाम दुर्व्यवस्थाओं से घिर जाता है तथा पुनः लूट-खसोट का कार्यक्रम प्रारंभ हो जाता है। यहां पर आ रहा है लोग तमाम अव्यवस्थाओं से ग्रसित है जिनका कोई पूरसाहाल नहीं है। सबसे मजेदार बात तो यह है कि इस केंद्र की तरफ जब भी कोई व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश करता है तो उन्हें फंसाने की साजिश रच पुरजोर कोशिश करते हैं। यदि नशा मुक्ति केंद्र के क्रियाकलापों कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि संस्था में प्रतिवर्ष कितने रुपए की लूट-खसोट बंदरबांट किया जाता है और संस्था द्वारा मरीजों को क्या सुख-सुविधाएं प्रदान की जाती हैं और उनके व्यय पर कितने रुपए खर्च किये जाते हैं जिनका आय व्यय का लेखा-जोखा का जांच कराया जाना निशांत आवश्यक है।
स्थानीय प्रबुद्ध,बुद्धिजीवी नागरिकों ने शासन-प्रशासन का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराते हुए अविलंब ही उच्चस्तरीय जांच कराकर उचित कानूनी कार्रवाई करवाते हुए दोषी व्यक्तियों को जेल के सलाखों के पीछे भेजे जाने की मांग की है ताकि सरकारी धन का लूट-खसोट, बंदरबांट होने से रोका जा सके।
देखना अब यह है कि इस दिशा एवं दशा में शासन प्रशासन कहां तक पहल कर उचित कार्रवाई कर पाने में सक्षम होती है?


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