
*जिला कारागार समेत आसपास के इलाकों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस*
*जिला कारागार समेत आसपास के इलाकों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस*
•~ खेलकूद के साथ सरकारी,गैर सरकारी संस्थाओं में ध्वजारोहण करकिया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी हुआ आयोजन
*अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र ।77 वां गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं में ध्वजारोहण कर गीत संगीत के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जगह-जगह खेलकूद का भी आयोजन किया गया।
इसी क्रम में जिला कारागार,पीएसी कैम्प,गुरमा पुलिस चौकी,जय ज्योति इण्टर कालेज ,शिशु शिक्षा निकेतन,विन्ध्य माध्यमिक हाई स्कूल गुरमा,ग्राम पंचायत भवन मारकुंडी,मार्डन कान्वेन्ट विद्यालय मारकुंडी,डीएस पब्लिक स्कूल अवई,सोनी मांटेसरी पूर्व माध्यमिक विद्यालय,खादी ग्राम उद्योग सलखन इत्यादि संस्थाओं, विद्यालयो, प्रतिष्ठानों में प्रभात फेरी,ध्वजारोहण कर सांस्कृतिक कार्यक्रम,खेलकूद प्रतियोगिता के साथ मिष्ठान का भी वितरण किया गया।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर ग्राम पंचायत भवन सलखन में ग्राम प्रधान प्रतिमा देवी गोंड के द्वारा ध्वजारोहण कर बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, बाबा साहब आंबेडकर महापुरुषों के साथ स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी शिवनाथ प्रसाद गोंड, शंकर प्रसाद गोंड, भागवत प्रसाद दूबे एवं द्वितीय विश्व युद्ध सेनानी मेवालाल पनिका के प्रतिमा व शिलापट्ट स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया, बता दें कि सलखन के चार स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं,सेनानी शिवनाथ प्रसाद गोंड का जन्म 12 सितंबर 1914 को हुआ था जो 1940 व भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जिसके कारण इन्हें भारत प्रति रक्षा कानून की धारा 34/42 के तहत 1 वर्ष की कैद की सजा और 200 रुपए की जुर्माना लगाया गया था, इसके बावजूद आज़ादी की लड़ाई में जुटे रहे, आजादी के 25 वें स्वतंत्रता दिवस पर 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था,सेनानी शंकर प्रसाद गोंड का जन्म 10 दिसंबर 1913 को हुआ और ये आज़ादी की लड़ाई में 1937 ई.को शामिल हुए और 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में इन्हें 1 वर्ष नज़र बंद कर लिया गया और इनका बंदूक भी जब्त कर ली गई थी जिसके कारण इनके द्वारा 1938 ई. में शिक्षा अभावग्रस्त बालक/बालिकाओं के शिक्षा हेतु स्थापित
विद्यालय व छात्रावास आर्थिक अभाव व संकट के कारण बंद हो गया था।आजादी के बाद पुनः उस विद्यालय को संचालित करने के लिए 1954 ई. में इन्होंने 5 बीघा जमीन दान देकर सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसायटी के सहयोग से कच्चे घर और खपरैल का बनवाकर विद्यालय संचालन का कार्य करवाया जो 1961-1962 ई. में राजा बलदेव दास बिड़ला को सौंप दिया गया था, इन्हें भी तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा 1972 ई. को ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया था,सेनानी भागवत प्रसाद दूबे का जन्म ग्राम सलखन में हुआ जो 1938 ई. में आजादी की जंग में शामिल हुए और 1941 सत्याग्रह, 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और नज़बंद कर इन्हें यातनाएं दी गई और ये आजीवन शादी नहीं किए पूरा जीवन भारत माता की सेवा में लगा दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध सेनानी मेवालाल पनिका का जन्म ग्राम सलखन (लालगंज)में हुआ जो 1939 ई. से 1945 ई.तक विश्व युद्ध तथा सुभाष चंद्र बोस जी के फौज में शामिल रहे।ध्वजारोहण, राष्ट्रगान कार्यक्रम में क्षेत्र के सम्मानित प्रबुद्ध, बुद्धिजीवी गणमान्य नागरिकगण उपस्थित मौजूद रहे।











