
*सलखन सब स्टेशन की हालत खराब, अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण त्रस्त,उपभोक्ताओं में आक्रोश*
*सलखन सब स्टेशन की हालत खराब, अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण त्रस्त,उपभोक्ताओं में आक्रोश
०- ग्रामीणों की हाय तौबा, विभाग पर फूटा गुस्सा, दी चेतावनी अब और बर्दाश्त नहीं
*अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा सोनभद्र। बिजली पैदा कर देश भर को रोशन करने वाला जनपद खुद अंधेरे में डूबा है। यहां तो वही कहावत हो गई कि “दीपक तले अंधेरा” खासतौर पर सलखन विद्युत सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गुरमा फीडर की स्थिति तो पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है । बेलगाम,
बेहिसाब,अनियमित और अघोषित बिजली कटौती ने ग्रामीणों की जिंदगी नरक बना दी है। हालत यह है कि लोग अब फाल्ट,ट्रिपिंग शट-डाउन जैसी शब्दावली से पूरी तरह अजीज और परेशान हो चुके हैं। विद्युत उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गुरमा,मारकुंडी ग्राम सभा के साथ उपेक्षात्मक पूर्ण मनमाना रवैया अपनाते हुए काफी सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। बताते हैं कि गुरमा मोड मारकुंडी मेन रोड पर विद्युत सप्लाई रहती है तो वही गुरमा,मारकुंडी गांव, मीना बाजार व आसपास के इलाकों में विद्युत सप्लाई बाधित रहती है क्योंकि गुरमा मोड मारकुंडी मेन रोड की सप्लाई छपका पावर हाउस से तो वही गुरमा ,मारकुंडी गांव,मीना बाजार व आसपास के इलाकों की सप्लाई विद्युत सब स्टेशन सलखन से होती है। क्या सौतेलापन नहीं तो क्या है? विद्युत उपभोक्ताओं का कहना है कि पूरे 24 घंटे में विद्युत सप्लाई महज 6 से 8 घंटे ही उपभोक्ताओं को मिलती है वह भी किस्तों में। उपभोक्ताओं का यह हाल है कि दिन में तो वे त्राहि त्राहि तो रात में हाय-तौबा करने की स्थिति बनी हुई है। आप तो बिजली मिलना एक लॉटरी जैसा हो गया है। दिन-रात मिलाकर मुश्किल से 6 से 8 घंटे बिजली मिल रही है वह भी कभी आए कभी जाए वाली स्थिति में रहती है। बार-बार की ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन से उपभोक्ताओं का धैर्य भी जवाब दे चुका है। भीषण व प्रचंड गर्मी और उमस के बीच लगातार बिजली गुल रहने से घरों में रहना मुश्किल सा हो गया है। इस प्रचंड उमस भरी गर्मी में जिंदगियां उबल रही हैं। बच्चों,बुजुर्गों और बीमारो की हालत सबसे खराब है वहीं पेयजल व्यवस्था भी ठप पड़ गई है। नहरे और माइनरे सूखी पड़ी है, जिससे सिंचाई के साधन खत्म हो चुके हैं और किसान भी गंभीर संकट में पड़ गया है। लगातार बिजली कटौती से दुकानदारों और छोटे व्यापारियों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। व्यापारियों के धंधे ठप ,चौपट के कगार पर पहुंच गए हैं। ग्रामीणों का
आरोप है कि विभागीय लापरवाही और ढिली जवाबदेही ने हालात बद से बदतर कर दिया है। स्थानीय लोगों में बिजली विभाग के प्रति गहरा जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि विभाग सिर्फ बाहरी कारणो का बहाना बनाता हैं जैसे- आंधी,बारिश, ग्रिड फेल, ट्रिपिंग, रोस्टिंग आदि, लेकिन कभी कोई ठोस समाधान नहीं देता कई उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्दी व्यवस्था नहीं सुधरे तो जन आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने के लिए पूर्णतया बाध्य होंगे जाएंगे।
इस संबंध में ग्राम पंचायत मारकुंडी के ग्राम प्रधान उधम सिंह यादव ने कहा कि मारकुंडी व आसपास के गांव में बिजली की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। हर रोज 15से 20 बार बिजली कट रही है और जब आती भी है तो वोल्टेज इतना काम होता है कि पंखा तक नहीं चल पाता। तेजल व्यवस्था पूरी तरह शर्म आ चुकी है और किसान सिंचाई के लिए रात भर जाकर इंतजार करते हैं । इस संबंध में कई बार बिजली विभाग के जे.ई.,एसडीओ से लेकर अधीक्षण
अभियंता तक को शिकायत की लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ। गांव की जनता भी अब आकर्षित है। उन्होंने बिजली विभाग से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को गंभीरता से स्थाई समाधान करें वरना ग्रामीण जनता के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवस होंगे। आप सवाल यह उठता है कि बिजली विभाग का जवाबदेह कौन है? क्या ऊर्जा मंत्री या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ रिपोर्ट देखकर संतुष्ट हैं या स्थल पर जाकर स्थिति का आकलन करेंगे? क्या ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिजली की मूलभूत सुविधा देना भी अब “मांग ” बन गई है? सवाल गंभीर है और जवाब मांगते हैं।











