सुखी पड़ी नहर,भारी गर्मी और प्यास के चलते तड़प रहे बेजुबान 

सुखी पड़ी नहर,भारी गर्मी और प्यास के चलते तड़प रहे बेजुबान

करमा, सोनभद्र (विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )

क्षेत्र मे बढ़ती उमस के साथ ही पेय जल की समस्या बढ़ने लगी है, पीने के पानी के लिए सबसे ज्यादा दिक्कत छुट्टा घुम रहे पशुओं की हो रही है, नहरों नालों के सुख जाने के कारण छुट्टा अवारा पशुओं के साथ ही जंगली जानवरों, पक्षियों को पानी को पानी नहीं मिल पा रहा है, भारी गर्मी और प्यास के चलते बेजुबान तड़प रहे है,
क्षेत्र मे नहरें सुखी पड़ी हैं, जिससे जमीन का जल स्तर भी तेजी से नीचे खिसक रहा है, गांवों मे लगे इंडिया मार्का टू हैंडपम्प मार्च से ही पानी छोड़ने लगा है, अब तक गांवों मे लगे आधे हैंडपम्प पानी छोड़ चुके हैं , फिर भी आदमी अपने और पालतू पशुओं के लिए किसी तरह पानी की ब्यवस्था कर ले रहे हैं , लेकिन छुट्टा, बेसहारा पशु पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है, बाजारों मे घुमने वाले छुट्टा पशु पानी की टंकी एवं हैंडपम्पों के आस पास दिन भर मड़राते देखे जा रहे हैं l जैसे ही कोई बर्तन लेकर पानी लेने आता है बेजुबान छुट्टा पशु बड़े ही ललचायी नजर से पानी लेने वाले को निहारते हैं , किसी ने पानी पिला दिया तो ठीक है, अगर पानी नही मिला तो पशु टंकी और हैंडपम्प के आसपास बैठे रहते हैं, करमा बाजार निवासी बिन्दू चौहान ने बताया बाजार मे लगे पानी की टंकी और हैंडपम्प के पास छुट्टा पशु रात दिन मड़राते देखे जा सकते हैं , ऐसे पशुओं के लिए पानी की ब्यवस्था की जानी चाहिये।शिव प्रसाद का कहना था कि दूर गांवों मे स्थित तालाब तक ऐसे पशु पहुंच नही पाते हैं और प्यासे तड़पते रह जा रहे हैं। क्षेत्र मे अधिक संख्या मे मौजूद नीलगायें फसलों के लिए भले ही आफत बनी हैं लेकिन पेयजल के लिए एक गांव से दुसरे गांव तक भटक रहीं हैं, एक तो भयंकर गर्मी दूसरे नहर नाले सब सुखे पड़े हुए हैं।
ऐसी स्थिति मे नहरों मे पानी अबिलम्ब छोड़ा जाना चाहिए , जिससे धरती का जल स्तर बना रहे और पशु पक्षियों को पीने के लिए पानी मिल सके ।


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