
*योगी सरकार में वामपंथियों की घेराबंदी? ‘निजता के अधिकार’ पर पुलिसिया डाका, सोनभद्र में गरजे कम्युनिस्ट कार्यकर्ता!*
*योगी सरकार में वामपंथियों की घेराबंदी? ‘निजता के अधिकार’ पर पुलिसिया डाका, सोनभद्र में गरजे कम्युनिस्ट कार्यकर्ता!*
•~ भाकपा-माकपा कार्यकर्ताओं ने वामदलों के बैनर तले कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर एक मांग पत्र राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को सौंपा
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता सेराज अहमद /अवधेश कुमार गुप्ता*
सोनभद्र।उत्तर प्रदेश को ‘सर्विलांस स्टेट’ में तब्दील करने और वामपंथी आंदोलन को कुचलने के कथित पुलिसिया प्रयासों के खिलाफ शनिवार को सोनभद्र कलेक्ट्रेट परिसर संग्राम का मैदान बन गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने संयुक्त वामदल के बैनर तले जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में हुंकार भरते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और पुलिस प्रशासन की अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
*व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला: ‘डेटा दो वरना जेल जाओ’*
प्रदर्शनकारी नेताओं ने उत्तर प्रदेश पुलिस और local intelligence unit (LIU) पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में वामपंथी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अवैध रूप से जासूसी कराई जा रही है। थानों से फोन, व्हाट्सएप संदेश और प्रोफार्मा के जरिए कार्यकर्ताओं पर संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियां देने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
*पुलिस द्वारा जबरन मांगे जा रहे डेटा में शामिल हैं:*
आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट और बैंक खातों का विवरण*पारिवारिक वंशावली (फैमिली ट्री) और निजी संपर्कों की सूची* चल-अचल संपत्ति, व्यवसाय और संपत्ति विवादों की जानकारी*
*सोशल मीडिया प्रोफाइल और डिजिटल गतिविधियों का ब्योरा*
नेताओं का स्पष्ट कहना है कि डेटा न देने पर कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं, जो सीधे तौर पर राज्य प्रायोजित तानाशाही है।
*संविधान के अनुच्छेद 21 की धज्जियां उड़ाने का आरोप*
वामपंथी नेताओं ने इस कार्रवाई को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के फैसले का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का इंटेलिजेंस विभाग राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपराधी या आतंकवादी की तरह चिन्हित कर रहा है। जन अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को दमन का शिकार बनाना लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।
*राज्यपाल से की गई प्रमुख मांगें:*
डोजियर व्यवस्था पर रोक: वामपंथी दलों व जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं का निजी डेटा जुटाने की असंवैधानिक प्रक्रिया तुरंत बंद हो।* उत्पीड़न समाप्त हो: पुलिस द्वारा नेताओं व कार्यकर्ताओं को दी जा रही धमकियों पर तत्काल अंकुश लगे।* निजता की सुरक्षा: नागरिकों के ‘राइट टू प्राइवेसी’ और लोकतांत्रिक संघर्ष के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
*प्रदर्शन में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति*
इस जनाक्रोश प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा जिला सचिव कामरेड आर. के. शर्मा और माकपा जिला मंत्री कामरेड नंद लाल आर्य ने किया। इस दौरान कामरेड प्रेमनाथ, कामरेड पुरुषोत्तम, कामरेड रामबचन, कामरेड रामेश्वर विश्वकर्मा, कामरेड जग नरायन, कामरेड महेंद्र भारतीय, दुर्जन भारतीय और कामरेड श्याम नारायण सहित दर्जनों कम्युनिस्ट कार्यकर्ता मौजूद रहे।











