
*मीरा-मोहन सी प्रीत लिख देना, सबके अधरों पे गीत लिख देना…*
*मीरा-मोहन सी प्रीत लिख देना, सबके अधरों पे गीत लिख देना…*
•~ पावस उमा महेश्वर काव्य संध्या में गूंजे गीत, ग़ज़ल और काव्य रचनाएं
•~ सोन संगीत फाउंडेशन के तत्वावधान में भव्य आयोजन, कवियों ने बांधा समां
*✍️ इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता: सेराज अहमद/अवधेश कुमार गुप्ता*
सोनभद्र। सोन संगीत फाउंडेशन के तत्वावधान में शनिवार की शाम शहर में पावस उमा महेश्वर काव्य संध्या का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों और कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक गीत, ग़ज़ल, शायरी और काव्य रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ ने की। मुख्य अतिथि समाजसेवी सरदार कमलेश सिंह खांबे रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि कवि दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ उपस्थित रहे।
वाणी वंदना के पश्चात निदेशक, शहीद स्थल प्रबंध समिति करारी प्रद्युम्न त्रिपाठी ने श्रृंगार रस की रचना—“मीरा मोहन सी प्रीत लिख देना, सबके अधरों पे गीत लिख देना”सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।कवि सुशील मिश्रा ने भोले बाबा को समर्पित पूर्वी प्रस्तुत की। सुधाकर पांडेय ‘स्वदेशप्रेम’ ने “जनाजा जब मेरा निकले, वतन के वास्ते निकले” सुनाकर देशप्रेम की भावना जगाई।कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए रचना प्रस्तुत की, वहीं दिव्या राय ने मां की पीड़ा और संवेदना को स्वर दिया। दयानंद दयालू ने पावस को समर्पित कजली सुनाई तथा धर्मेश चौहान ने “बड़ा ही सुंदर, बड़ा ही मनहर अपना हिंदुस्तान” प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं।संचालक अशोक तिवारी ने अपनी व्यंग्यात्मक रचना के माध्यम से रहनुमाओं पर तंज कसा। अध्यक्षीय काव्य पाठ में अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ ने राष्ट्र आराधना की रचना प्रस्तुत की।विशिष्ट अतिथि दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ ने अपनी हास्य रचना से उपस्थित लोगों को देर तक गुदगुदाया। मुख्य अतिथि
कमलेश खांबे ने देश, समाज और परिवार की संवेदनाओं को बचाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। विवेक चतुर्वेदी ने शायरी से महफिल को रोशन किया।
इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी, त्रिपुरारी मिश्रा, लालता प्रसाद मिश्र, ठाकुर कुशवाहा, फारुख अली सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सोन संगीत फाउंडेशन के अध्यक्ष सुशील मिश्रा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।











