*उत्साह व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया ईद-ए -मिलाद-उन-नबी*

*उत्साह व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया ईद-ए -मिलाद-उन-नबी*
•-निकाला गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी का भव्य जुलूस
•-मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी भाग लेकर दिया आपसी भाईचारे का संदेश
•-समाज को शांति, सद्भभावना और आपसी भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता – धर्म नारायण भार्गव

*अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। रावर्ट्सगंज के विकासखंड के गुरमा, मारकुंडी सलखन मे शुक्रवार को सुबह मुस्लिम बन्धुओं ने ईद-ए -मिलाद-उन-नबी (मौलिदुन्नबी) बड़े ही उत्साह व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मोहम्मद पैगंबर साहब के जन्मदिन के अवसर पर जश्ने ईद मिलादुन्नबी का भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस गुरमा मस्जिद से लेकर जेलकैम्प तथा कसहवाघाट मीनाबाजार होते हुए प्रस्थान किया।इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी भाग लिया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।हजरत मोहम्मद साहब का जीवन प्रेम, शांति और इंसानियत का संदेश देता है। हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में सौहार्द और एकता बनाए रखना चाहिए। इस बाबत नगर पंचायत चुर्क-गुर्मा तथा ग्राम पंचायत मारकुंडी के सौजन्य से साफ सफाई की चौबंद व्यवस्था की गई थी। इस मौके पर सभासद अशफाक कुरैशी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने हमेशा सामाजिक सौहार्द, सच्चाई और ईमानदारी का संदेश दिया है। उनके आदर्शों पर चलना ही समाज को मजबूत बनाता है। वहीं चौकी प्रभारी धर्म नारायण भार्गव ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने इंसानियत और सत्य का जो संदेश दिया है, उसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। आज के समय में समाज को शांति, सद्भभावना और आपसी भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है। हाजी एजाज अहमद के मुताबिक यह पर्व इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।इस्लाम धर्म के अनुसार, इसी दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। माना जाता है कि वर्ष 571 ईस्वी में सऊदी अरब के मक्का नगर में उनकी पैदाइश हुआ था। उनका पूरा नाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है। उन्हें इस्लामिक धर्म का आखिरी पैगंबर माना जाता है।
*ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का पर्व खुशी या ग़म?*
रबी-उल-अव्वल माह की 12वीं तारीख को ही पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। मान्यता है कि इसी दिन उनका वफ़ात (इंतकाल) भी हुआ था। यही कारण है कि कई लोग इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं, जबकि कुछ इसे शोक के रूप में भी मानते हैं।सुबह से ही मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज के बाद जुलूस निकाला गया, जिसमें छोटे-बड़े सभी शामिल हुए। लोग नारे-ए-तकबीर और नात-ए-पैगंबर पढ़ते हुए पैगंबर की शिक्षाओं को याद कर रहे थे। कई स्थानों पर कुरान की तिलावत, दरूद
-ओ-सलाम और मिलाद शरीफ के आयोजन हुए।
इस अवसर पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने नए कपड़े पहनकर बड़ों से आशीर्वाद और ईदी प्राप्त की। वहीं महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर परिवार और रिश्तेदारों के साथ त्यौहार की खुशियां साझा कीं।
*•-कैसे मनाई जाती है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी?*
इस दिन अल्लाह की इबादत की जाती है।घरों, मस्जिदों और गलियों को सजाया जाता है।जुलूस निकाले जाते हैं और लोग आपस में गले मिलकर बधाई देते हैं।गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता की जाती है।
कई स्थानों पर विद्वान और कवि 13वीं सदी के सूफी कवि बुसिरी की प्रसिद्ध रचना क़सीदा अल-बुरदा शरीफ का पाठ कर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
*पैगंबर मोहम्मद का जन्म और संदेश*
पैगंबर मोहम्मद के जन्म से पहले लोग अज्ञानता और अंधकार में जीवन व्यतीत कर रहे थे और अल्लाह के मार्ग से भटक गए थे। तब अल्लाह ने उन्हें अपना संदेशवाहक बनाकर धरती पर भेजा। वे अल्लाह की एकता और सत्य का संदेश लेकर आए। उनकी शिक्षाओं ने लोगों को सही मार्ग दिखाया और उन्हें अच्छाई-बुराई में अंतर समझने की शक्ति प्रदान की।त्योहार को लेकर इलाके के बाजारों और आसपास के गांवों में रौनक देखने को मिली। मुस्लिम समाज के लोगों ने गरीबों और जरूरतमंदों में भोजन व मिठाइयां बांटकर इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया।त्यौहार को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की। चौकी प्रभारी गुरमा धर्म नारायण भार्गव अपने हमराही पुलिस बल के साथ लगातार गश्त करते रहे, जिससे क्षेत्र में शांति और सौहार्द्र बना रहे। इस पावन पर्व पर ग्राम प्रधान मारकुंडी उधम सिंह यादव,हाजी मंसूर खान,एकलाख खान,इरशाद खान,पेस इमाम कुतुबुद्दीन,एड. निजामुद्दीन,अफसर खान,अख्तर खान,अंशु ,
महफूज,नफीस आलम,मोहसिन अंसारी,सैफखान,सेराज आलम, शहजाद कुरैशी,इश्तियाक कुरैशी, अहमद अली बाबा,अहद अली,गुड्डू अंसारी,सदर सरफुद्दीन,असलम, आफताब शाह,मुस्तफा,खुर्शीद अहमद,अब्दुल कलाम,अब्दुल्ला, गुलशन सरोज, दीपक यादव समेत सैकड़ों हिंदू- मुस्लिम बंधु उपस्थित रहे।


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