बीजपुर में स्वास्थ्य विभाग का छापा या नूराकुश्ती सील तोड़ने वाले पैथोलॉजी सेंटर पर फिर मेहरबानी क्यों

बीजपुर में स्वास्थ्य विभाग का छापा या नूराकुश्ती सील तोड़ने वाले पैथोलॉजी सेंटर पर फिर मेहरबानी क्यों

23 दिसंबर को सील हुआ था एक पैथोलॉजी, 2 घंटे में टूट गई थी सील, अब फिर दी गई 3 दिन की मोहलत

सोनभद्र( विनोद मिश्रा/सेराज अहमद)

बीजपुर में अवैध पैथोलॉजी सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। सोमवार की देर शाम बीजपुर बाजार स्थित एक पैथोलॉजी सेंटर पर सहायक मुख्य चिकित्साधिकारी गुरु प्रसाद की छापेमारी एक हाई वोल्टेज ड्रामा बनकर रह गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे छापेमारी के बजाय सेटिंग-गेटिंग का खेल करार दिया है।सोमवार शाम जैसे ही एसीएमओ की टीम बीजपुर पहुंची तो अचानक एक पैथोलॉजी सेंटर का शटर गिर गया और संचालक मौके से गायब हो गया। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों का दावा है कि टीम के पहुंचने से पहले ही विभाग के किसी विभीषण ने फोन कर संचालक को छापेमारी की सूचना दे दी थी। टीम के मौके पर पहुंचने पर सिर्फ बंद शटर मिला, जिस पर नोटिस चस्पा कर अधिकारी अपनी पीठ थपथपाते नजर आए।इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की नीयत पर है।रिकॉर्ड के मुताबिक, इसी पैथोलॉजी सेंटर को 23 दिसंबर को सील किया गया था।लेकिन संचालक के हौसले इतने बुलंद थे कि सील होने के महज 2 घंटे बाद ही सील तोड़कर सेंटर फिर से शुरू कर दिया गया।ग्रामीणों का सवाल जायज है कि सरकारी सील तोड़ना एक गंभीर अपराध है,फिर भी पिछले 22 दिनों तक विभाग ने कोई एफआईआर या ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की और अब जब दोबारा छापा मारा गया,तो सीधे कार्रवाई करने के बजाय 3 दिन की मोहलत क्यों दी गई क्या यह विभाग की लाचारी है या फिर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयान में पैथोलॉजी के संचालक ने खुद को निर्दोष बताया है।संचालक का कहना है,मैं किसी जरूरी काम और छोटी बच्ची की दवा लेने बैढन गया था। मुझे रास्ते में एसीएमओ सर के दौरे की खबर मिली तो मैं भागा-भागा आया। तब तक नोटिस लग चुका था। मैंने सर को अपने पेपर्स दिखाए, जिस पर उन्होंने मुझे 3 दिन के अंदर जिला मुख्यालय पर सारे कागजात प्रस्तुत करने को कहा है। जांच के बाद ही सेंटर खोलने का आदेश मिलेगा।क्या छापेमारी से पहले ही सूचना लीक होना विभाग के अंदर ‘काली भेड़ों’ की मौजूदगी का सबूत नहीं है फिलहाल, एसीएमओ ने संचालक को दस्तावेज दिखाने के लिए 3 दिन का समय दिया है, लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी या फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी।


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