बुद्ध विहार जवाही पटेहरा में सम्राट अशोक महान का जन्मोत्सव भव्य रूप से संपन्न

बुद्ध विहार जवाही पटेहरा में सम्राट अशोक महान का जन्मोत्सव भव्य रूप से संपन्न

करमा,सोनभद्र। (विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )
स्थानीय विकास खंड के गांव पटेहरा स्थित बुद्ध विहार जवाही में बुधवार को देर शाम तक सम्राट अशोक महान का जन्मोत्सव हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सम्राट अशोक की लोक कल्याणकारी नीतियों और उनके आदर्श शासन व्यवस्था को जन-जन तक पहुँचाना था। कार्यक्रम का आगाज भारतीय संविधान की प्रस्तावना के वाचन, दीप प्रज्वलन, त्रिशरण एवं पंचशील की परंपरा के साथ किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने तथागत बुद्ध एवं सम्राट अशोक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता मा.विकास शाक्य जी ने धम्म के महत्व पर जोर देते हुए कहा बुद्ध के शीलों को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। हमें अन्य धर्मों की आलोचना करने से बचना चाहिए, क्योंकि किसी की आलोचना करना स्वयं धम्म को कमजोर करने के समान है। मुख्य वक्ता जवाहर लाल मौर्य एवं संजय मौर्य ने सम्राट अशोक की कुशल शासन व्यवस्था और उनके द्वारा प्रतिपादित नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। रमेश गौतम (जिलाध्यक्ष, आप सोनभद्र ) विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक का शासन आम आदमी की सहूलियत और कल्याण को ध्यान में रखकर चलाया जाता था। वक्ता अंशुमान मौर्य ने संबोधन में बताया कि बौद्ध धम्म अपनाने के बाद भी अशोक का वैचारिक सीमा विस्तार जारी रहा, यही कारण है कि आज विश्व के अधिकांश देशों में बौद्ध धर्म का प्रभाव है। समाजसेवी विशाल सिंह ‘विपुल’ अतिथियों एवं दर्जनों उपासकों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किए साथ ही आगे भी सहयोग देने की बात की ,कार्यक्रम की अध्यक्षता रामप्रताप मौर्य ने की, जबकि संचालन घनश्याम मौर्य, स्वारथ मौर्य एवं मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र मौर्य द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सुरेंद्र मौर्य(प्रधान पटेहरा लालब्रत मौर्य और सुरेश मौर्य समिति संरक्षक), अजीत कांत निराला (जिलाध्यक्ष, सम्राट अशोक क्लब भारत),रामाज्ञा मौर्य (प्रधान भरूंहा) सर्वजीत कुशवाहा (प्रबंधक), नेमचंद मौर्य, संदीप मौर्य समेत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और सम्राट अशोक के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।


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