
बिजली-पानी के संकट से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, शाहगंज विद्युत उपकेंद्र का किया घेराव; 24 घंटे में सुधार की चेतावनी
बिजली-पानी के संकट से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, शाहगंज विद्युत उपकेंद्र का किया घेराव; 24 घंटे में सुधार की चेतावनी
सोनभद्र( विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )
जनपद में पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के बीच अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और जले हुए ट्रांसफार्मर न बदले जाने से नाराज ग्रामीणों का धैर्य आज जवाब दे गया। घोरावल तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्थानीय शाहगंज विद्युत उपकेंद्र पर दर्जनों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने परिसर का घेराव कर बिजली विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी की।
समस्या और आक्रोश का कारण:
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और किसान नेताओं ने बताया कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में मात्र 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है। अघोषित बिजली कटौती के कारण ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है और किसानों की फसलें सूख रही हैं। इसके अलावा, कई गांवों में लगे ट्रांसफार्मर हफ्तों से जले पड़े हैं, जिनकी शिकायत टोल-फ्री नंबर और स्थानीय लाइनमैन से करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
ग्रामीण क्षेत्रों में तय रोस्टर (शेड्यूल) के अनुसार न्यूनतम 18 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाए।जले हुए ट्रांसफार्मरों को विभागीय नियमानुसार 48 घंटे के भीतर तत्काल बदला जाए।लो-वोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए अतिरिक्त क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए जाएं।
अधिकारियों का आश्वासन:
घेराव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बिजली विभाग के विभागीय अधिकारी (एसडीओ/अधिशासी अभियंता) मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया। विभागीय अधिकारियों ने माना कि अत्यधिक लोड और उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी के कारण पिछले कुछ दिनों से आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अगले 24 घंटे के भीतर जर्जर तारों को ठीक कर लिया जाएगा और जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आंदोलन की चेतावनी –
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और रोस्टर के अनुरूप सप्लाई नहीं मिली, तो उपभोक्ता बिना किसी पूर्व सूचना के जिला मुख्यालय पर बेमियादी धरना और चक्का जाम करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और जिला प्रशासन की होगी।











