
*मारकुंडी के सैकड़ों किसानों ने बीजों का मिनी किट न मिलने पर विरोध-प्रदर्शन कर लगाये मुर्दाबाद के नारे*
*मारकुंडी के सैकड़ों किसानों ने बीजों का मिनी किट न मिलने पर विरोध-प्रदर्शन कर लगाये मुर्दाबाद के नारे*
•~उपकृषि निदेशक कार्यालय मंगुराही का घेराव कर जताया आक्रोश
*अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। मंगुराही स्थित उपकृषि निदेशक कार्यालय पर मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ग्राम मारकुण्डी के किसानों ने बीजों के मिनी किट लेने पहुंचे और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को बताया गया कि अभी मिनी किट निःशुल्क नहीं मिलेगा, निःशुल्क मिनी किट आगामी तीन सप्ताह बाद मिलेगा। मौके पर पहुंचे किसानों ने इसकी सूचना ग्राम प्रधान मारकुण्डी उधम सिंह यादव को दी, जिस पर मौके पहुंचे ग्राम प्रधान ने कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से कहा कि वर्तमान समय में खेती-किसानी का सीजन है और आज से तीन सप्ताह बाद यदि आप मिनी किट को निःशुल्क देंगे, तो इसका किसानों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। जब शासन द्वारा उन्नत एवं रोग प्रतिरोधी फसलों के बीजों की मिनी किट को मुफ्त बांटने का प्राविधान है, तो उसे निःशुल्क ही देना चाहिए। इसके अलावा ग्राम प्रधान ने अधिकारियों से यह भी कहा कि इन किसानों ने नियमानुसार दर्शन पोर्टल से पंजीकरण कराकर टोकन जारी कराया है, ताकि उन्हें शासन से निःशुल्क मिनी किट प्राप्त हो सके, परन्तु आज जब खेती किसानी का समय बीत जायेगा,तो बाद में उक्त मिनी किट वितरण का कोई उद्देश्य ही नहीं रह जायेगा। ग्राम प्रधान व किसानों की बातों को कोई असर कृषि विभाग के अधिकारियों पर नहीं पड़ा और वे अपनी बात पर अड़े रहे। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान व किसानों ने प्रदर्शन किया और इस दरम्यान लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों के मुर्दाबाद के नारे लगाये।बताते है कि उत्तर प्रदेश शासन कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म के तिलहन, दलहन और मोटे अनाज के बीज मुफ्त मिनी किट के रूप में प्रदान करती है।इन किटों को प्राप्त करने के लिए किसानों को दर्शन-एक पोर्टल/ऐप या नजदीकी जन सेवा केंद्र पर ऑनलाइन
आवेदन करना होता है।ऑनलाइन बुकिंग के बाद किसानों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से होता है, जिसके बाद स्थानीय राजकीय कृषि बीज भंडार से निःशुल्क मिनी किट बांटी जाती है, परन्तु कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा वर्तमान समय में निःशुल्क मिनी किट न देने से ग्राम प्रधान व ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और ग्राम प्रधान यह आरोप लगाते दिखे कि खेती किसानी के मौसम में निःशुल्क किट नहीं दिया जायेगा, तो बाद में उस मिनी किट का कोई महत्व नहीं रह जायेगा। कृषि विभाग का यह रवैया “का बरखा जब कृषि सुखाने” लोकोक्ति को चरितार्थ करती है, जो कहीं न कहीं शासन की नीति एवं प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को परिभाषित करती है। इस दौरान किसानों ने यह आरोप भी लगाया कि हम किसानों को महीनों से कार्यालय दौड़ाया जा रहा है, परन्तु कई बार कार्यालय जाने के बाद भी उन्हें बैरंग लौटना पड़ा, जिससे किसानों को गुस्सा फूट पड़ा।
इस मौके पर ग्राम प्रधान मारकुण्डी उधम सिंह यादव,गुलाब, कमलेश, बुद्धिराम, गोविन्द, भोला, कयर आदि दर्जनों किसान मौजूद रहे।











