*मारकुंडी में गंदगी का ‘ग्रहण’, कूड़े के ढेर और जाम नालियों से त्रस्त ग्रामीण!*

*मारकुंडी में गंदगी का ‘ग्रहण’, कूड़े के ढेर और जाम नालियों से त्रस्त ग्रामीण!*
•~ गुरमा मोड़ से पनिका, यादव व दलित बस्तियों तक सफाई व्यवस्था ध्वस्त—दुर्गंध और मच्छरों के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार बेखबर

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

गुरमा-सोनभद्र। राबर्ट्सगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत मारकुंडी में स्वच्छता व्यवस्था की बदहाल तस्वीर ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। गुरमा मोड़, मीनाबाजार, पनिका बस्ती, यादव बस्ती, दलित बस्ती समेत आसपास के क्षेत्रों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे होने और नालियां कूड़े-कचरे से जाम होने के कारण गंदगी का अंबार खड़ा हो गया है। सफाई व्यवस्था की कथित अनदेखी से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।गांव के बीचों- बीच जमा कूड़े के ढेर और लंबे समय से साफ न हुई नालियां स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। नालियों में गंदगी भरी होने के कारण जलनिकासी प्रभावित है और कई स्थानों पर गंदा पानी रास्तों के आसपास जमा होने की शिकायत है। इससे उठती दुर्गंध के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
*गंदगी के बीच मच्छरों का प्रकोप, बीमारी का खतरा बढ़ा*
ग्रामीणों का कहना है कि सफाई व्यवस्था नियमित नहीं होने से मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कूड़े और गंदे पानी के कारण संचारी रोगों के फैलने की आशंका भी बनी हुई है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। जलनिकासी बाधित होने के कारण गंदा पानी इधर-उधर फैलने से ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सफाई व्यवस्था की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
*शिकायतें पहुंचती रहीं, लेकिन कूड़े के ढेर जस के तस!*
ग्रामीणों के मुताबिक स्वच्छता व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद गांव में नियमित सफाई नहीं होने से समस्या लगातार विकराल होती जा रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से गांव में नहीं पहुंचते, जिसके कारण कूड़ा जमा होता रहता है और नालियों की समय से सफाई नहीं हो पाती। महीनों से पड़े कूड़े के ढेर अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गए हैं।
*सवाल यह कि आखिर सफाई व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?*
ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद यदि सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि गांव की स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर की जा रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं है, या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है?सरकार और प्रशासन जहां स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चलाने का दावा करते हैं, वहीं मारकुंडी की बस्तियों में कूड़े और जाम नालियों की स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।

*‘अब सफाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे ग्रामीण’*
लगातार परेशानी झेल रहे ग्रामीणों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाकर कूड़े के ढेर हटाए नहीं गए और नालियों की सफाई नहीं कराई गई तो वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से तत्काल कूड़ा हटाने, जाम नालियों की सफाई कराने, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा नियमित सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है।ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों के बाद भी सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन किया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
*अब देखना है—जागेगा प्रशासन या कूड़े के ढेर में दबती रहेगी ग्रामीणों की आवाज?*
मारकुंडी में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कराए और आवश्यक कार्रवाई करे। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तत्काल सफाई और स्थायी समाधान का इंतजार है।


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