*ओवरलोडिंग के खेल से हर साल ₹182 करोड़ की चपत का दावा*

*ओवरलोडिंग के खेल से हर साल ₹182 करोड़ की चपत का दावा*
•~ ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, लोडिंग प्वाइंट से जांच चौकी तक जांच की मांग

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

सोनभद्र। जनपद में गिट्टी-बालू के परिवहन में कथित बड़े पैमाने पर हो रही ओवरलोडिंग को लेकर सोनभद्र ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ओवरलोडिंग पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है। एसोसिएशन का दावा है कि ओवरलोडिंग के कारण सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये तथा सालाना करीब 182 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की स्थिति बन रही है।
*20 घन मीटर के परमिट पर 30 घन मीटर तक लोडिंग का आरोप*
एसोसिएशन द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जनपद में प्रतिदिन करीब 1,000 से अधिक वाहन गिट्टी और बालू का परिवहन करते हैं। निर्धारित परमिट से अधिक खनिज लादे जाने का आरोप लगाते हुए उदाहरण दिया गया है कि जहां वाहन के लिए करीब 20 घन मीटर का परमिट होता है, वहीं कुछ मामलों में करीब 30 घन मीटर तक खनिज लादे जाने की बात कही गई है।
एसोसिएशन के अनुसार यदि प्रति वाहन औसतन 10 घन मीटर अतिरिक्त खनिज लादे जाने की स्थिति मानी जाए और इसकी औसत कीमत 500 रुपये प्रति घन मीटर हो, तो एक वाहन पर करीब 5,000 रुपये के अतिरिक्त खनिज का मूल्य बैठता है। 1,000 वाहनों के आधार पर यह राशि प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपये, मासिक करीब 15 करोड़ रुपये और वार्षिक स्तर पर लगभग 182 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।एसोसिएशन का कहना है कि यह गणना केवल अतिरिक्त खनिज के अनुमानित मूल्य के आधार पर है। इसमें रॉयल्टी, शास्ति एवं अन्य सरकारी शुल्कों से संभावित राजस्व क्षति को शामिल किया जाए तो नुकसान का आंकड़ा और अधिक हो सकता है।
*लोडिंग प्वाइंट से जांच चौकी तक जवाबदेही तय करने की मांग*
एसोसिएशन ने ओवरलोडिंग रोकने के लिए प्रत्येक लोडिंग प्वाइंट पर परमिट के अनुरूप ही खनिज लोड कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड, वास्तविक वजन और वजन पर्ची की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है।ज्ञापन में कहा गया है कि ओवरलोडिंग की स्थिति में केवल चालक या ट्रक मालिक के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय ओवरलोडिंग कराने वाले लोडिंग प्वाइंट संचालकों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
*जांच चौकी के रिकॉर्ड का हो वाहनवार मिलान*
एसोसिएशन ने रॉबर्ट्सगंज खनिज जांच चौकी की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की मांग की है। उसका कहना है कि यदि कोई वाहन जांच चौकी पार करने के बाद किसी अन्य स्थान पर ओवरलोड पकड़ा जाता है तो संबंधित मामले में जांच चौकी के रिकॉर्ड एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।इसके लिए ई-परमिट, ट्रांजिट पास, ई-एमएम-11, वजन पर्ची, सीसीटीवी फुटेज और जांच चौकी के डिजिटल रिकॉर्ड का वाहनवार मिलान कराने की मांग की गई है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
*डाला का बंद ‘6 नंबर बैरियर’ फिर शुरू करने की मांग*
एसोसिएशन ने डाला क्षेत्र में बंद पड़े ‘6 नंबर बैरियर’ जांच चौकी की व्यवस्था को पुनः संचालित करने की मांग भी उठाई है। एसोसिएशन के अनुसार इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित अवैध एवं ओवरलोड परिवहन पर प्रभावी निगरानी की जा सकती है।
*वैध ट्रक संचालकों के हितों की भी उठाई आवाज*
एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश देव पाण्डेय एवं प्रतिनिधियों का कहना है कि ओवरलोडिंग के कारण नियमों का पालन करते हुए परिवहन करने वाले ट्रक मालिकों को आर्थिक नुकसान के साथ असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि एक ओर नियमों का पालन करने वाले वाहन निर्धारित मात्रा में खनिज लेकर चलते हैं, वहीं दूसरी ओर ओवरलोड वाहनों को बढ़ावा मिलने से वैध परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है।
एसोसिएशन ने जिलाधिकारी से लोडिंग प्वाइंट से लेकर जांच चौकी और गंतव्य स्थल तक परिवहन से जुड़े सभी अभिलेखों की गहन जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वालों की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकारी राजस्व की सुरक्षा और पारदर्शी परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।


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