
लोकल से ग्लोबल तक की उड़ान: फेसबुक और टिकटॉक का स्वदेशी विकल्प बनाने वाले सहरसा के कुमार प्रवीण को मिलेगा ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’
जिला स्कूल से निकले एक आम छात्र ने ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ के जरिए 25 से अधिक देशों में फैलाया अपना कारोबार, अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला बड़ा सम्मान।
सहरसा/नई दिल्ली: जब इरादे फौलादी हों और कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो छोटे शहरों की गलियों से भी वैश्विक सफलता की कहानियां लिखी जा सकती हैं। सहरसा (बिहार) के गौतम नगर निवासी श्री मनोज कुमार व श्रीमती महालक्ष्मी देवी के सुपुत्र कुमार प्रवीण ने इसे सच कर दिखाया है। देश को ‘फ्लेम डॉट कॉम’ और ‘लाइव मी’ जैसे बेहतरीन स्वदेशी ऐप देने वाले कुमार प्रवीण को अब आईटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।
‘आत्मनिर्भर भारत’ के सच्चे सिपाही कुमार प्रवीण का तकनीकी सफर हमेशा से ‘वोकल फॉर लोकल’ की तर्ज पर रहा है। जब देश को एक मजबूत देसी सोशल नेटवर्क की दरकार थी, तब प्रवीण ने मार्क जुकरबर्ग से प्रेरणा लेते हुए ‘फ्लेम डॉट कॉम’ (Flame.com) का निर्माण किया। यह केवल एक सोशल साइट नहीं थी, बल्कि इसमें ऑनलाइन बिजनेस और मल्टीमीडिया डाउनलोड जैसी सुविधाएं भी थीं। इसके बाद, जब चीनी ऐप टिकटॉक का बोलबाला था, तब प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान पर प्रवीण ने ‘लाइव मी’ (Live Me) शॉर्ट-वीडियो और चैटिंग ऐप बनाकर विदेशी कंपनियों को सीधी टक्कर दी थी।
एक साहसिक फैसला और ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ का जन्म सहरसा के जिला स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद प्रवीण ने आगरा के साईं नाथ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक किया। पढ़ाई पूरी कर उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन उनका विजन एक कर्मचारी बनने तक सीमित नहीं था। वे समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खुद की कंपनी की नींव रखी। शुरुआत में उन्होंने शिक्षण संस्थानों के लिए ऑनलाइन एग्जाम सॉफ्टवेयर बनाए और आज वे ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ (Mytesta Technology) के सफल सीईओ हैं।
25 से अधिक देशों में बज रहा है डंका आज कुमार प्रवीण के नेतृत्व में ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ वेब डेवलपमेंट, न्यूज़ पोर्टल डेवलपमेंट, RNI/PRGI कंसल्टेंसी और कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम है। उनकी कंपनी आज भारत की सीमाओं को पार कर दुनिया के 25 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मेहनत को पहचान इस उपलब्धि पर बात करते हुए कुमार प्रवीण कहते हैं, “तकनीक का असली मकसद लोगों की जटिल समस्याओं को आसान बनाना है।” हाई-एंड इंजीनियरिंग और आधुनिक यूज़र इंटरफेस को अपनी प्राथमिकता बनाने वाले प्रवीण कुमार को यह ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’ उनकी इसी ‘क्लाइंट-फर्स्ट’ अप्रोच के लिए दिया जा रहा है।
सहरसा के एक आम छात्र से लेकर एक अंतरराष्ट्रीय टेक-कंपनी के सीईओ बनने तक का उनका यह सफर बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है कि अगर सपनों में जान हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।











