
*जी हां!यहां मौत के साए में लोग जी रहे हैं जिंदगी……….* •~सुविधा शुल्क का खेल,संबंधित रखते हैं तालमेल
*जी हां!यहां मौत के साए में लोग जी रहे हैं जिंदगी……….*
•~सुविधा शुल्क का खेल,संबंधित रखते हैं तालमेल
•~हैवी ब्लास्टिंग से हिल जाती हैं मकानों की नींव,छा जाता है धुंध
•~लीज खदानों से बिना परमिट के टीपरों से हो रहा है बोल्डरों का अवैध परिवहन
•~संदेह के घेरे में है संबंधितों की चुप्पी
*अवधेश कुमार गुप्ता*
सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत चोपन थाना क्षेत्र के बर्दिया ग्राम स्थित अली स्टोन व अन्य खदानों से धड़ल्लें से बिना परिवहन प्रपत्र एम. एम. (11) परमिट के धड़ल्ले बोल्डरों का टीपरों से अवैध परिवहन डंके की चोट पर दिनदहाड़े दिन दूनी,रात चौगुनी किया जा रहा है बावजूद इसके संबंधित विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे मौन बने हुए हैं। सूत्रों की माने तो इन अवैध परिवहन के पत्थरों को बिल्ली- ओबरा में स्थापित क्रेशर प्लांटो में क्रसिंगं कर गिट्टी के निर्माण के लिए टीपर से बिना रोक-टोक ढ़ोया जा रहा हैं।बताते हैं कि खदान मालिक कभी- कभी अधिक मात्रा में बोल्डर निकालने के लिए हैवी ब्लास्टिंग का भी प्रयोग करते हैं।जिससे कि अधिक बोल्डर निकला जा सके।जिसके कारण अगल-बगल निवास कर रहे रह वासियों के मकान की नींव तक हिल जाती हैं तथा चारों तरफ धुंध सा छा जाता है तथा शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होता है।संबंधित यह कह के अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि खदान लीज है।कर भी क्या सकते हैं? केवल खानापूर्ति के तौर पर हैवी ब्लास्टिंग करने पर खदान मालिक को हिदायत देकर छोड़ देते हैं जिससे खदान मालिकों का हौसला काफी बुलंद है। यहां के रहवासी इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय संकट से भी जूझ रहे हैं।इलाके में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों,भारी वाहनों की आवाजाही और धूल के गुब्बार ने आम जनजीवन को हाल बेहाल कर दिया है।हालात ऐसे हैं कि लोगों का अब घर से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है।ग्रामीणों की माने तो तहसील क्षेत्र में स्थापित दर्जनों क्रशर प्लांटों,लीज खदानों के संचालन से उड़ रही धूल पूरे क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया है।सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं कराए जाने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।सुबह-शाम हवा में घुला प्रदूषण लोगों की जीवन पर सीधा हमला कर रहा है।बच्चों,बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी रोग व खांसी,दमा,आंखों में जलन और त्वचा रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।कई परिवारों को इलाज के लिए बाहर के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल, विशेष शिविर या जांच अभियान नहीं चलाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद जिला प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की।सवाल अब उठ रहा है कि जब लोगों की सेहत दांव पर है तो जिम्मेदार विभाग आखिर मौन क्यों हैं?क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?।
मजे कि बात यह हैं कि संबंधित विभाग मौन रहता हैं क्योंकि सुविधा शुल्क सेट हैं।इसी तरह से बालू खदानों पर सड़क बनाने के लिए नीचे झाड़ी का प्रयोग खदान मालिक करते हैं लेकिन विभाग मौन रहता हैं।यह अवैध कारोबार जिला
खनिज विभाग,स्थानीय पुलिस व वन कर्मियों की मिलीभगत से होता है। पत्थर चोरों द्वारा इसके एवज में पुलिस व वन विभाग को बंधी बंधाई रकम देते है।सेटिंग हो जाने के बाद चोर पत्थर की बेधड़क ढुलाई करते हैं।अवैध पत्थर के कारोबार में लगे पत्थर चोर आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं तथा राजनीतिक रूप से भी अपनी पहुंच बनाए हुए हैं।जो जांच का विषय बना हुआ हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।











