*उत्साह,हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अजहा*

*उत्साह,हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अजहा*
•~ मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी भाग लेकर दिया आपसी भाईचारे का संदेश
•~ समाज को शांति,सद्भभावना और आपसी भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता -अतुल कुमार पटेल

*अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा,सोनभद्र।रावर्ट्सगंज के विकास खंड के गुरमा-मारकुंडी में पेश इमाम हाफिज मुमताज साहब, करगरा मोड,सलखन मे इमाम इसराइल ने गुरुवार की सुबह मुस्लिम बन्धुओं ने ईद-उल -अजहा की नमाज अदा करायीऔर देश में अमन चैन की दुआ मांगी गई।नमाज अदा करने के बाद मुस्लिम भाइयों ने एक दूसरे से गले मिल ईद मुबारकबाद एक दूसरे को दिए।ईद-उल- अजहा (बकरीद)बड़े ही उत्साह व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।ईद-उल- अज़हा (बकरीद) का त्यौहार पैगंबर हज़रत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के प्रति दिखाए गए सर्वोच्च त्याग,समर्पण,बलिदान और अटूट विश्वास की याद में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है।यह पर्व मुख्य रूप से कुर्बानी (बलिदान) के माध्यम से अपनी सबसे प्रिय चीज़ को ईश्वर की राह में न्योछावर करने का संदेश देता है।इस मौके पर भव्य जुलूस निकाला गया।कुर्बानी के इस पावन पर्व पर मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी भाग लिया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। पैगंबर हजरत इब्राहिम का जीवन

प्रेम,शांति,त्याग,बलिदान और इंसानियत का संदेश देता है।हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में सौहार्द और एकता बनाए रखना चाहिए।इस बाबत नगर पंचायत चुर्क-गुर्मा के सौजन्य से साफ-सफाई की चौबंद व्यवस्था की गई थी।इस मौके पर सभासद अशफाक कुरैशी ने कहा कि पैगंबर हजरत इब्राहिम साहब ने हमेशा सामाजिक सौहार्द,सच्चाई और ईमानदारी का संदेश दिया है।उनके आदर्शों पर चलना ही समाज को मजबूत बनाता है।वहीं चौकी प्रभारी गुरमा अतुल कुमार पटेल ने कहा कि उन्होंने इंसानियत और सत्य का जो संदेश दिया है,उसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत है।आज के समय में समाज को शांति,सद्भभावना और आपसी भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है।
मान्यताओं के मुताबिक माह-ए- रमजान और ईद-उल-फितर की रौनक के बाद मुस्लिम समाज को जिस पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है।वह है ईद उल-अजहा,जिसे आम तौर पर बकरीद कहा जाता है।यह इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व है।यह त्यौहार सोनभद्र जिला मुख्यालय सहित आस-पास के इलाकों में गहरी आस्था और परंपरा के साथ मनाया जाता है।इस बार बकरीद का त्यौहार 28 मई 2026 गुरुवार को मनाई गयी।भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में बकरीद का त्यौहार सौहार्द और आपसी सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आता है।लोग एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं और समाज में प्रेम,शांति और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।यह त्यौहार इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने धू अल हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है और हज यात्रा के समापन का प्रतीक होता है।इस अवसर पर मक्का में लाखों हाजी पवित्र हज यात्रा पूरी करते हैं।वहीं दुनिया भर के मुसलमान नमाज अदा कर कुर्बानी की रस्म निभाते हैं।ईद उल अजहा को जाता है।इस दिन हजरत इब्राहिम की उस महान आस्था, बलिदान और समर्पण को याद किया जाता है।जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने सबसे प्रिय बेटे का बलिदान देने जा रहे थे।इसे बलिदान का पर्व भी कहा जाता है।इस्माइल को कुर्बान करने का निश्चय किया था।मान्यता के अनुसार जब वह इस कठिन परीक्षा को पूरा करने जा रहे थे,तभी अल्लाह ने उनकी नियत और विश्वास को स्वीकार करते हुए उनके बेटे की जगह एक मेमने का बच्चा(भेंड़) कुर्बानी के लिए भेज दिया।यही घटना इस पर्व की आधारशिला मानी जाती है।बकरीद का मुख्य संदेश त्याग,समर्पण और इंसानियत है।इस दिन दी जाने वाली कुर्बानी की मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है,एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए,दूसरा जरूरतमंदों के लिए और तीसरा अपने परिवार के लिए रखा जाता है।यह परंपरा समाज में समानता, भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।यही कारण है कि कई लोग इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं।सुबह से ही मस्जिदों, ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।नमाज अदा करने में छोटे-बड़े सभी शामिल हुए।लोग नारे-ए- तकबीर और नात-ए-पैगंबर पढ़ते हुए पैगंबर की शिक्षाओं को याद कर रहे थे।कई स्थानों पर कुरान की तिलावत, दरूद-ओ-सलाम और मिलाद शरीफ के आयोजन हुए।इस अवसर पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।उन्होंने नए कपड़े पहनकर बड़ों से आशीर्वाद और ईदी प्राप्त की।वहीं महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर परिवार और रिश्तेदारों के साथ त्यौहार की खुशियां साझा कीं।इस दिन अल्लाह की इबादत की जाती है।घरों,मस्जिदों और गलियों को सजाया जाता है।लोग आपस में गले मिलकर बधाई देते हैं।गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता की जाती है।त्योहार को लेकर इलाके के बाजारों और आसपास के गांवों में रौनक देखने को मिली।मुस्लिम समाज के लोगों ने गरीबों और जरूरतमंदों में भोजन व मिठाइयां बांटकर इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया।त्यौहार को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की।चौकी प्रभारी गुरमा अतुल कुमार पटेल अपने हमराही पुलिस बल के साथ लगातार गश्त करते रहे,जिससे क्षेत्र में शांति और सौहार्द्र बना रहे।इस पावन पर्व पर एकलाख खान,इरशाद खान, एड.निजामुद्दीन, अफसर खान, अख्तर खान,अंशु ,महफूज,नफीस आलम,मोहसिन अंसारी,सैफ खान,सेराज आलम,शहजाद कुरैशी,इश्तियाक कुरैशी “गुड्डू”, अहमद अली “बाबा”,शहजादे अहमद,शहंशाह,सज्जाद अहमद, शमशाद अहमद “शानू”,इद्रीश व सादिक अली,अरमान,फरमान खान,अहद अली,गुड्डू अंसारी, सरफुद्दीन,असलम,सदर आफताब शाह,मुस्तफा,खुर्शीद अहमद,अब्दुल कलाम,अब्दुल्ला,अरमान,असलम शहाबू,जमालू समेत बृजेश कनौजिया,दयाशंकर पांडेय,अनिल कुमार,श्रीकांत समेत सैकड़ों हिंदू- मुस्लिम बंधु उपस्थित रहे।


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