ग्राम पंचायतों के हर काम में कंसल्टिंग इंजीनियर अनिवार्य!

ग्राम पंचायतों के हर काम में कंसल्टिंग इंजीनियर अनिवार्य!

सरकारी अभियंताओं की मौजूदगी के बावजूद निजी इंजीनियरों को दो प्रतिशत शुल्क देने की तैयारी

16 दिसंबर 2021 के शासनादेश की व्यवस्था से अलग 24 मई 2026 को जारी पत्र पर उठे सवाल

सोनभद्र (विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )

ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के प्राक्कलन और माप पुस्तिका तैयार कराने के लिए कंसल्टिंग इंजीनियरों को अनिवार्य किए जाने को लेकर पंचायती राज विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 24 मई 2026 को पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे सभी कार्यों का प्राक्कलन और माप पुस्तिका इम्पैनल्ड आर्किटेक्ट/कंसल्टिंग इंजीनियर से ही तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेष कार्यों की व्यवस्था को सभी कामों पर लागू करने का आरोप

मामले में आपत्ति जताने वालों का कहना है कि पंचायती राज विभाग के शासनादेश संख्या 2350/33-3-2021-2257/2021, पंचायती राज अनुभाग-3, लखनऊ, दिनांक 16 दिसंबर 2021 में कंसल्टिंग इंजीनियरों की सेवाएं लेने की व्यवस्था विशेष परिस्थितियों में ओडीएफ प्लस के अंतर्गत बड़े निर्माण कार्यों के लिए की गई थी।इस व्यवस्था के तहत प्रदेश में 1825 कंसल्टिंग इंजीनियरों की तैनाती के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। निर्धारित शर्तों के तहत प्राक्कलित लागत का दो प्रतिशत परामर्श शुल्क दिए जाने की व्यवस्था थी। आरोप है कि अब इसी व्यवस्था को ग्राम पंचायतों के सभी विकास कार्यों पर लागू किया जा रहा है।

सरकारी विभागों के अवर अभियंता पहले से तैनात

ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के प्राक्कलन एवं माप पुस्तिका तैयार करने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, लघु सिंचाई विभाग, मंडी समिति, जिला पंचायत, लोक निर्माण विभाग, आवास विकास और जल निगम सहित विभिन्न विभागों के अवर अभियंता पहले से उपलब्ध हैं। जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी स्तर से इन्हें विकासखंडों में कार्यों के लिए नामित किया जाता रहा है।इन सरकारी अभियंताओं के लिए पंचायतों को अलग से परामर्श शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ता। कार्य में लापरवाही या अनियमितता मिलने पर उनकी जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

दो प्रतिशत शुल्क’ से बढ़ेगा पंचायतों पर वित्तीय भार

इम्पैनल्ड कंसल्टिंग इंजीनियरों से प्राक्कलन और एमबी तैयार कराने की अनिवार्यता को लेकर सबसे बड़ा सवाल अतिरिक्त वित्तीय भार का है। आरोप है कि दो प्रतिशत परामर्श शुल्क के चलते ग्राम पंचायतों के विकास बजट पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा।वहीं, निजी कंसल्टिंग इंजीनियरों के माध्यम से प्राक्कलन तैयार कराने की व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों ने मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने और 16 दिसंबर 2021 के शासनादेश तथा 24 मई 2026 के पत्र का तुलनात्मक परीक्षण कराने की मांग की है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग

मामले में यह भी मांग उठाई गई है कि यदि सरकारी विभागों के अभियंता ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के प्राक्कलन और एमबी तैयार करने में सक्षम हैं तो निजी कंसल्टिंग इंजीनियरों को अनिवार्य करने का औचित्य स्पष्ट किया जाए। साथ ही अतिरिक्त शुल्क से सरकारी धन पर पड़ने वाले भार और व्यवस्था में संभावित अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।


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