*एक ही बरसात में दूसरी बार बह गया वैकल्पिक मार्ग जिम्मेदार कौन? ठेकेदार और जिम्मेदारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*

*एक ही बरसात में दूसरी बार बह गया वैकल्पिक मार्ग जिम्मेदार कौन? ठेकेदार और जिम्मेदारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*
~ पुल निर्माण के नाम पर आफत में आवागमन : सैकड़ो स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों की सुरक्षा दांव पर, जिला जेल का रास्ता भी प्रभावित
~ घाघर की बाढ़ ने खोली वैकल्पिक मार्ग की पोल, स्कूली बच्चों से लेकर जेल आवागमन तक संकट में – ठेकेदार और विभाग से जवाब मांग रहे ग्रामीण

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

गुरमा-सोनभद्र। सदर विकासखंड के गुरमा-मारकुंडी स्थित मीनाबाजार घाघर नदी पर जिला कारागार जाने वाले पुल का निर्माण आमजन के लिए लगातार परेशानी का सबब बनता जा रहा है। पुल निर्माण के चलते आवागमन के लिए बनाए गए अस्थायी वैकल्पिक संपर्क मार्ग को घाघर नदी की बाढ़ ने दूसरी बार बहा दिया है। बीते 21 जुलाई को बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ यह मार्ग 18 अगस्त मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने से पुनः बह गया। इससे क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।वैकल्पिक मार्ग के बार-बार बह जाने से स्कूली बच्चों, शिक्षकों, मरीजों, दैनिक मजदूरों, व्यापारियों, ग्रामीणों, जिला कारागार से जुड़े लोगों तथा पशुपालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते की दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों में विभागीय व्यवस्था के प्रति तीव्र आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब पहली बार बाढ़ में मार्ग क्षतिग्रस्त हुआ था, तभी भविष्य में होने वाली बारिश और बाढ़ को देखते हुए इसे मजबूत एवं सुरक्षित बनाया जाना चाहिए था। इसके बावजूद दूसरी बार भी वही स्थिति उत्पन्न हो गई।
*सैकड़ों विद्यार्थियों की राह हुई मुश्किल*
नगर पंचायत चुर्क-गुर्मा के गुरमा स्थित जय ज्योति इंटरमीडिएट कॉलेज, विंध्य माध्यमिक उच्चतर विद्या मंदिर, शिशु शिक्षा निकेतन, सरकारी प्राथमिक विद्यालय सहित मारकुंडी के हाईस्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। वैकल्पिक मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से स्कूल बसों, ऑटो, दोपहिया वाहनों और पैदल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।बरसात के कारण मार्ग पर कीचड़ और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे फिसलकर गिरने और दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। अभिभावकों को भी छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है।
*मरीजों और ग्रामीणों के लिए भी बढ़ी परेशानी*
इसी मार्ग से जिला कारागार के आसपास स्थित कई गांवों के लोग भी आवागमन करते हैं। रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों, मजदूरों और व्यापारियों के साथ-साथ मरीजों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग बाधित होने से लोगों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण जरूरी है, लेकिन निर्माण के दौरान आमजन के लिए सुरक्षित और टिकाऊ वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना भी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। बार-बार वैकल्पिक रास्ता बहना इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
*बार-बार टूट रहा रास्ता, जिम्मेदारी किसकी?*
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जुलाई में बाढ़ के दौरान वैकल्पिक मार्ग बह गया था, तो उसकी मरम्मत के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ के पानी के दबाव को देखते हुए मजबूत व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अगस्त में दोबारा मार्ग बह जाने से स्पष्ट है कि वैकल्पिक मार्ग को पर्याप्त मजबूती और सुरक्षा के साथ तैयार नहीं किया गया।लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बारिश के बीच स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और मरीजों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
*शीघ्र दुरुस्ती का मिला आश्वासन*
इस संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार से वार्ता की गई तो उन्होंने वैकल्पिक मार्ग को शीघ्र समतल एवं सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि विद्यालयों की बसों, विद्यार्थियों, ग्रामीणों तथा अन्य वाहनों का आवागमन सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।ग्रामीणों ने मांग की कि केवल मिट्टी डालकर औपचारिक मरम्मत करने के बजाय मार्ग को बाढ़ और तेज बारिश के अनुरूप मजबूत बनाया जाए, ताकि वह दोबारा नदी के पानी में न बहे। साथ ही निर्माण स्थल एवं वैकल्पिक मार्ग पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए आवश्यक स्थानों पर संकेतक, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाए जाने की मांग की गई।
*जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि यह सीधे जनहित और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को इसे प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए तत्काल स्थायी एवं सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। पुल निर्माण के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा और सुगम आवागमन की जिम्मेदारी से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।*


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