
*बारिश बनी आफत, उफनते नाले ने तोड़ी पुलिया की सुरक्षा दीवार! रास्ता बना मौत का खतरा*
*बारिश बनी आफत, उफनते नाले ने तोड़ी पुलिया की सुरक्षा दीवार! रास्ता बना मौत का खतरा*
•~ मारकुंडी-मकरीबारी मार्ग पर मंडराया बड़ा खतरा, आवागमन हुआ जोखिमपूर्ण
•~ तेज बहाव में धराशायी हुई सेफ्टी वॉल, ग्रामीण बोले—हादसे से पहले जागे प्रशासन
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मारकुंडी से तेलाई-चकरिया, मकरीबारी होते हुए चिरुई जाने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर स्थित पुलिया उफनते पहाड़ी नाले के तेज बहाव की चपेट में आ गई।
*➡️ तेज बहाव में भरभराकर गिरी सेफ्टी वॉल*
पहाड़ी नाले में अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव ने पुलिया की सुरक्षा दीवार को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। सेफ्टी वॉल धराशायी होने के बाद पुलिया से होकर गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है।
*➡️ बड़े हादसे की आशंका, राहगीरों में दहशत*
क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण बड़े और छोटे वाहनों के चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बरसात के दौरान नाले का पानी और तेज होने पर यहां किसी भी समय दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
*➡️ जान हथेली पर रखकर गुजर रहे लोग*
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से रोजाना ग्रामीणों का आवागमन होता है। पुलिया की सुरक्षा दीवार टूटने के बाद वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गुजरना पड़ रहा है।लोगों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
*➡️ सवालों के घेरे में निर्माण और रखरखाव व्यवस्था*
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि बरसात से पहले पुलिया और उसकी सुरक्षा दीवार की मजबूती की जांच क्यों नहीं कराई गई? पहाड़ी क्षेत्र में तेज जलप्रवाह की संभावना के बावजूद समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा के इंतजाम न होना चिंता का विषय है।
*➡️ ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार*
क्षेत्रीय आदिवासी वन बंधुओं एवं ग्रामीणों रघुनाथ, रामनारायण, रमाशंकर, राजेंद्र सिंह गौड़, शिवरतन, गुलाब और तुलसी समेत अन्य लोगों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
*ग्रामीणों की प्रमुख मांगें—*
🔴 मौके का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
🔴 क्षतिग्रस्त पुलिया के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
🔴 सेफ्टी वॉल और पुलिया की शीघ्र मरम्मत कराई जाए।
🔴 मरम्मत तक सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए।
*⚠️ ग्रामीणों की दो टूक—हादसे के बाद नहीं, पहले चेते प्रशासन!*
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग ने समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया तो बारिश के दौरान पुलिया की यह क्षति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
*अब बड़ा सवाल—*
क्या किसी अनहोनी के बाद जागेगा विभाग, या समय रहते होगी पुलिया की मरम्मत?











