*टिमटिमाते दीयों से रोशन हुई धरती, खुशियों की जगमगाहट से खिल उठे चेहरे *

*टिमटिमाते दीयों से रोशन हुई धरती, खुशियों की जगमगाहट से खिल उठे चेहरे *

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता सेराज अहमद /अवधेश कुमार गुप्ता*

सोनभद्र। अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर खुशियों की विजय का प्रतीक दीपावली का महापर्व रविवार को जनपद में पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। दीपों की टिमटिमाती लौ ने जैसे ही अमावस्या की काली रात को रोशन करना शुरू किया, वैसे ही नगर से लेकर गांवों तक हर घर-आंगन दीपमालाओं की अनुपम छटा से जगमगा उठा। मिट्टी के दीयों की सुनहरी रोशनी, रंग-बिरंगी विद्युत झालरों की चमक और आकर्षक रंगोलियों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। चारों ओर खुशियों, श्रद्धा और उल्लास का ऐसा संगम दिखाई दिया, मानो धरती पर दीपों का स्वर्ग उतर आया हो।धन-धान्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की विधि- विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। घरों में सुबह से ही साफ-सफाई, सजावट और पूजन की तैयारियां चलती रहीं। शाम होते ही श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में पूजा की थाली सजाकर दीप प्रज्ज्वलित किए और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए मंगलकामना की। नगर के विभिन्न स्थानों पर सजे आकर्षक पूजा पंडालों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मनोहारी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थापित की गईं। पंडालों की सजावट, रंगीन रोशनी और भक्ति संगीत ने पर्व की शोभा में चार चांद लगा दिए।
*घर-आंगन से देवालयों तक दीपों की अनुपम छटा*
दीपावली की शाम ढलते ही नगर, कस्बों और ग्रामीण अंचलों में दीपोत्सव की अद्भुत छटा देखने को मिली। लोगों ने अपने घरों के मुख्य द्वार, छतों, बालकनियों, तुलसी चौरे और मंदिरों में दीप जलाकर प्रकाश पर्व का स्वागत किया। कहीं मिट्टी के पारंपरिक दीयों की कतारें सजी थीं तो कहीं रंग-बिरंगी विद्युत झालरों ने घरों को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। महिलाओं और युवतियों ने घरों के आंगन में सुंदर रंगोलियां बनाईं। बच्चों में दीप जलाने और घर सजाने को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।परंपराओं के निर्वहन के क्रम में शनिवार की शाम ग्रामीण क्षेत्रों में यम का दीपक निकाला गया। वहीं दीपावली की अमावस्या पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार वर्षभर के लिए काजल तैयार किया। भोर में सूप बजाकर घर से दरिद्रता को बाहर करने की लोकपरंपरा का भी निर्वहन किया गया। इन परंपराओं ने दीपावली के सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व को जीवंत बनाए रखा।
*बाजारों में उमड़ी भीड़, दुकानों पर रही रौनक*
दीपावली को लेकर कई दिनों से सजे बाजारों में पर्व के दिन भी खूब चहल-पहल रही। नगर से लेकर ग्रामीण बाजारों तक दुकानदारों ने आकर्षक ढंग से अपनी दुकानें सजाई थीं। रंग-बिरंगी झालरें, बिजली के सजावटी उपकरण, मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजन सामग्री और सजावटी सामान लोगों को आकर्षित करते रहे।मिठाई की दुकानों पर लड्डू, पेड़ा, बर्फी सहित विभिन्न प्रकार की मिठाइयों की खरीदारी होती रही। वहीं चूड़ा, लाई, चीनी के हाथी-घोड़े और पारंपरिक खिलौनों की दुकानों पर बच्चों की विशेष भीड़ दिखाई दी। महिलाओं ने पूजन सामग्री और घर की सजावट से जुड़े सामानों की खरीदारी की तो युवाओं में भी पर्व को लेकर खासा उत्साह रहा। दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही से बाजार देर शाम तक गुलजार रहे।
*आतिशबाजी को लेकर बच्चों में दिखा उत्साह*
दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी की दुकानों पर भी विभिन्न प्रकार के पटाखे और रोशनी वाले उत्पाद सजे रहे। बच्चों और युवाओं में आतिशबाजी को लेकर उत्साह दिखाई दिया। हालांकि पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सावधानी बरतने की अपील भी की गई। लोगों से तेज आवाज वाले पटाखों से बचने, बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही आतिशबाजी करने देने तथा खुले स्थानों पर ही पटाखे जलाने का आग्रह किया गया। साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए आसपास पानी और बालू की व्यवस्था रखने की सलाह दी गई।

*दीपों की रोशनी के साथ खुशियों और भाईचारे का संदेश*
दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का पर्व ही नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने का भी संदेश देता है। लोगों ने एक-दूसरे के घर पहुंचकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा कीं। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी पर्व के उल्लास में सराबोर नजर आए।
सचमुच, टिमटिमाते दीपों की रोशनी ने अमावस्या की रात को उजाले से भर दिया। हर घर में खुशियों की दस्तक और हर चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी। दीपावली के पावन अवसर पर लोगों ने यही कामना की कि प्रकाश का यह पर्व सभी के जीवन से दुख, निराशा और अज्ञान का अंधकार मिटाकर सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आए। *’जलाओ दीये, मगर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए…’* इसी संदेश के साथ सोनभद्र में दीपोत्सव का पर्व श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक गरिमा के बीच हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।


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