*पितृ पक्ष का महा पर्व पितरों के पूजन व श्राद्ध कर्म का पर्व*- राम अनुज धर द्विवेदी,

*पितृ पक्ष का महा पर्व पितरों के पूजन व श्राद्ध कर्म का पर्व*- राम अनुज धर द्विवेदी,

स्व भगवान धर द्विवेदी के पुण्य तिथि पर हरिशंकरी पौधे का किया गया रोपण,

सोनभद्र( विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )

शाहगंज / पितृपक्ष की शुरुआत होने पर सभी पितर पृथ्वीलोक में रहने वाले अपने-अपने घर परिवार व सगे-संबंधियों के यहाँ आते हैं तथा अपने घर परिवार व सगे-संबंधियों द्वारा प्रदान किए गए पिण्ड दान आदि से तृप्त होकर उन्हें अनेकानेक शुभाशीर्वाद प्रदान करते हैं।पितृपक्ष में अपने पितरों की संतुष्टि हेतु तथा अनंत व अक्षय तृप्ति हेतु एवं उनका शुभाशीर्वाद प्राप्त करने हेतु प्रत्येक मनुष्य को अपने पितरों का श्राद्ध अवश्यमेव करना चाहिए।इसी क्रम में बुधवार को चतुर्थी श्राद्ध पर घोरावल तहसील क्षेत्र के महुआंव पाण्डेय गांव निवासी स्व. भगवान धर द्विवेदी की पुण्यतिथि पर उनके पुत्र राम अनुज धर द्विवेदी द्वारा परंपरागत रूप से कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में ब्राह्मण भोजन के उपरांत हरिशंकरी वृक्ष का रोपण किया गया।वट, पीपल, पाकड़ के पौधों का रोपण किया गया। यह पौधा उनकी स्मृति में गांव के तालाब पर रोपित किया गया। ऐसा माना जाता है कि इस पौधों में ब्रह्मा विष्णु महेश का वाश होता है।इस वृक्ष को त्रिवेणी संगम वृक्ष भी कहा जाता है।इस हरिशंकरी के पौधे के रोपड़ से गांव के लोग लाभान्वित होंगे। बताते चलें कि स्व भगवान धर द्विवेदी श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य संरक्षक संस्थापक रहें। यह वृक्ष तालाब पर रामलीला मैदान प्रांगण में व नर्वदेश्वर महादेव मंदिर के बगल के प्रांगण में रोपित किया गया।इस अवसर पर प्रधान पुजारी नारायण धर द्विवेदी,सौरव तिवारी,रोशन शुक्ला,सत्य धर द्विवेदी, श्री सिद्धेश्वर महादेव सेवा संस्थान के पदाधिकारी प्रेरित धर द्विवेदी, जनार्दन प्रसाद पाण्डेय, सत्य प्रकाश पाठक, अवधेश पाण्डेय,अमरेश पाण्डेय,विमलेश धर द्विवेदी, मनीष व अम्बिका सहित तमाम लोग मौजूद रहकर हरिशंकरी संगम त्रिवेणी के पौधे का रोपण किया।प्रत्येक सनातनधर्मी को अपने पूर्वजों की तीन पीढ़ियों – पिता, दादा तथा परदादा, माता, दादी, परदादी के साथ ही अपने नाना तथा नानी का भी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। साथ ही परिवार में जिसकी भी मृत्यु हो गई हो उनका भी श्राद्ध करना चाहिए। जो जीवित हों उनको छोड़कर सभी दिवंगत व्यक्तियों की पुण्यतिथि के दिन ही उनका श्राद्ध करना चाहिए।मृत्युतिथि से तात्पर्य उस तिथि से है जो तिथि अंतिम श्वास परित्याग के समय विद्यमान हो। उसी तिथि को श्राद्ध पक्ष में दोपहर के समय 11 से 1:30 बजे तक श्राद्ध करना चाहिए। यदि तिथि ज्ञात न हो तो स्त्रियों का मातृ नवमी एवं पुरुषों का सर्व पितृ अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए। सर्व पितृ अमावस्या पर सबका श्राद्ध किया जा सकता है।


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