
*कुम्हारो की दीपावली पर लगा ग्रहण!दीये तैयार, बाजार जाने का रास्ता बेकार; अधूरी सड़क ने बढ़ाई मुसीबत, प्रशासन बेखबर*
*कुम्हारो की दीपावली पर लगा ग्रहण!दीये तैयार, बाजार जाने का रास्ता बेकार; अधूरी सड़क ने बढ़ाई मुसीबत, प्रशासन बेखबर*
•~ छह माह से अधूरी सड़क ने कुम्हारों की दीपावली पर फेरा पानी, रोजी-रोटी पर संकट*
•~ दूसरों के घर रोशन करने वाले कारीगरों के घरों तक पहुंचना मुश्किल, बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे मिट्टी के दीये और बर्तन
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी जिला ब्यूरो प्रमुख सेराज अहमद/संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*
सोनभद्र। दीपावली पर दूसरों के घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों के अपने घरों तक पहुंचने वाला रास्ता ही अंधेरे में है। छह माह से अधूरी पड़ी सड़क ने माटीकला से जुड़े कारीगरों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण सीजन में सड़क की बदहाली के चलते उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालत यह है कि दिन-रात मेहनत कर तैयार किए गए मिट्टी के दीये, खिलौने और बर्तनों को बाजार तक पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।
मामला आदर्श नगर पालिका परिषद सोनभद्र के वार्ड नंबर 10 स्थित जोगिया का है। यहां मंदिर के पास प्राथमिक विद्यालय से कोहरान बस्ती तक जाने वाला करीब 400 मीटर लंबा मार्ग पिछले छह माह से अधूरा पड़ा है। सड़क पर मिट्टी डालकर निर्माण कार्य छोड़ दिए जाने से पूरा रास्ता बदहाल हो गया है। हल्की बारिश होते ही मार्ग कीचड़ और फिसलन से भर जाता है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है।इस मार्ग के आसपास बड़ी संख्या में कुम्हार एवं माटीकला से जुड़े परिवार निवास करते हैं। दीपावली के मद्देनजर इन परिवारों ने मिट्टी के दीये, खिलौने और विभिन्न प्रकार के बर्तन तैयार किए हैं। त्योहार का सीजन इन कारीगरों की सालभर की कमाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन बदहाल सड़क ने उनकी मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। कीचड़ और फिसलन के कारण न तो वाहन आसानी से निकल पा रहे हैं और न ही तैयार सामान सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में कारीगरों को अपनी मेहनत की कमाई डूबने की चिंता सताने लगी है।
*छह माह से निर्माण का इंतजार, त्योहार पर भी नहीं मिली राहत*
स्थानीय निवासी बाबूलाल प्रजापति ने बताया कि करीब छह माह पहले सड़क पर मिट्टी डालकर छोड़ दी गई थी। इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। कई महीने बीत जाने के बावजूद सड़क को दुरुस्त नहीं कराया गया। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।वहीं लक्ष्मीकांत ने बताया कि हल्की बारिश होते ही सड़क कीचड़युक्त और बेहद फिसलन भरी हो जाती है। आए दिन स्कूली बच्चे फिसलकर गिर रहे हैं। सड़क के किनारे पोखरा होने के कारण किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि खराब रास्ते के चलते बाइक तक निकलना मुश्किल हो गया है। किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने या आपात स्थिति में एंबुलेंस पहुंचना भी चुनौती बन सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन कारीगरों को हो रही है, जिन्हें दीपावली के लिए तैयार मिट्टी के सामान बाजार तक पहुंचाने हैं।स्थानीय निवासी गीता देवी ने भी सड़क की दुर्दशा पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मिट्टी डालने के बाद से मार्ग को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
*दीपावली पर दूसरों के घर रोशन करने वालों कुम्हारो के घरों तक का रास्ता अंधेरे में*
विडंबना यह है कि दीपावली पर दूसरों के घरों को रोशन करने के लिए दीये तैयार करने वाले कुम्हार परिवार खुद बदहाल सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं। सड़क निर्माण में देरी के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। दीपक, टिंकू, जितेंद्र, शांतनु, रामधनी, रवि सहित अन्य ग्रामीणों ने नगर पालिका प्रशासन से दीपावली से पहले सड़क निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह महज 400 मीटर सड़क का मामला नहीं, बल्कि इस मार्ग पर रहने वाले सैकड़ों लोगों के दैनिक आवागमन, बच्चों की सुरक्षा और माटीकला से जुड़े परिवारों की आजीविका का सवाल है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि कारीगरों को अपना तैयार सामान बाजार तक पहुंचाने में राहत मिल सके और बच्चों, बुजुर्गों सहित आम नागरिकों को रोजाना की परेशानी से निजात मिल सके।











