
*अधिवक्ता की निर्मम हत्या से उबाल, सरकार की कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल*
*अधिवक्ता की निर्मम हत्या से उबाल, सरकार की कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल*
•~ कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या पर अधिवक्ता समाज में आक्रोश, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की उठी पुरजोर मांग
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता विनोद मिश्रा /अवधेश कुमार गुप्ता*
सोनभद्र। कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की निर्मम हत्या को लेकर अधिवक्ता समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा करते हुए एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राघवेंद्र नारायण ने प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इस अमानवीय घटना की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। आज पूरे प्रदेश का अधिवक्ता समाज आक्रोशित होने के साथ ही गहरे दुख और पीड़ा में है। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए न्याय दिलाने की मांग की।
राघवेंद्र नारायण ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सरकार का कानून व्यवस्था पर कोई प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है। अधिवक्ता लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार इस गंभीर मांग पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले अधिवक्ता ही यदि सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिवक्ताओं पर लगातार हो रहे हमले और हत्या जैसी घटनाएं पूरे विधि समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कानून बनाना समय की मांग है।
*एक करोड़ मुआवजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग*
वरिष्ठ अधिवक्ता राघवेंद्र नारायण ने प्रदेश सरकार से मांग की कि मृतक अधिवक्ता के परिजनों को तत्काल एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही हत्याकांड में शामिल दोषियों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कठोरतम सजा दिलाई जाए। उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग भी उठाई।उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे, ताकि अधिवक्ताओं को निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करने का सुरक्षित वातावरण मिल सके। यदि सरकार ने अब भी अधिवक्ताओं की सुरक्षा और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं को न्याय और सुरक्षा मिलने तक यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।











