
सेवानिवृत्त सीओ ने थामा हल, 45 बीघा में खड़ा किया जैविक खेती का अनूठा मॉडल।
सेवानिवृत्त सीओ ने थामा हल, 45 बीघा में खड़ा किया जैविक खेती का अनूठा मॉडल।
सोनभद्र( विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )
अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त क्षेत्राधिकारी (सीओ) सच्चिदानंद त्रिपाठी प्रकृति के प्रहरी बन गए हैं। कभी अपराधियों के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले त्रिपाठी आज अपने पैतृक गांव, केवाल में जैविक खेती, बागवानी और पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। उनका यह प्रयास किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। जिले के कोन थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम- केवाल निवासी 63 वर्षीय सच्चिदानंद त्रिपाठी स्वर्गीय श्याम सुंदर त्रिपाठी के पुत्र हैं। उनके पिता जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक थे। पांच भाइयों और तीन बहनों में वह तीसरे स्थान पर हैं। उनकी पत्नी डॉ. रंजना त्रिपाठी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उनके दो पुत्र हैं, जिनमें एक सिविल इंजीनियर तथा दूसरा आईटी क्षेत्र में कार्यरत है।
वर्ष 1989 में उपनिरीक्षक (एसआई) के रूप में पुलिस सेवा में शामिल हुए सच्चिदानंद त्रिपाठी ने लखनऊ, आजमगढ़, प्रयागराज, जौनपुर, बहराइच, महाराजगंज, बस्ती और गोरखपुर सहित कई जनपदों में अपनी सेवाएं दीं। लगभग 34 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने 22 पुलिस मुठभेड़ों में भाग लिया और वर्ष 2023 में क्षेत्राधिकारी (सीओ) पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने शहर की सुविधाओं के बजाय अपने गांव की मिट्टी को चुना। आज वह 45 बीघा भूमि पर धान, गेहूं, सरसों, सांवा और कोदो जैसी फसलों की पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही पांच बीघा क्षेत्र में लगभग एक हजार सफेद चंदन, 500 टाइवानी अमरूद, काली हल्दी, आंवला, अर्जुन, सागौन, शीशम, महोगनी, नारियल, बादाम, नाशपाती, विभिन्न प्रजातियों के आम, लीची, लाल केला, पपीता, नींबू, अंजीर, गुलाब तथा अनेक औषधीय पौधों का विकसित उद्यान तैयार किया है।
इतना ही नहीं, पशुपालन को भी उन्होंने अपनी कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार बनाया है। उनके गौशाला में गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की 15 से अधिक गायें हैं। आधुनिक सोच, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का उनका यह मॉडल न केवल किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है, समाज सेवा से नहीं।











