*“बम-बम भोले” के जयघोष से गूंजा गौरीशंकर धाम*

*“बम-बम भोले” के जयघोष से गूंजा गौरीशंकर धाम*
•~ सावन के तीसरे सोमवार नागपंचमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सैकड़ों बाल बम कांवरियों ने किया भोलेनाथ का जलाभिषेक

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता सेराज अहमद /अवधेश कुमार गुप्ता*

गुरमा-सोनभद्र। सावन मास के तीसरे सोमवार एवं नागपंचमी के पावन पर्व पर सुप्रसिद्ध प्राचीन गौरीशंकर धाम श्रद्धा, भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आया। शाहगंज कस्बे एवं आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों बाल बम कांवरियों ने पवित्र जल लेकर नंगे पांव करीब छह किलोमीटर की पदयात्रा की और गौरीशंकर धाम पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। मंदिर परिसर एवं यात्रा मार्ग पूरे समय “बम-बम भोले” और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा।

*गेरुआ वस्त्रों में निकली आस्था की टोली, जयकारों से भक्तिमय हुआ माहौल*
कांवरियों ने महामाया से पवित्र जल भरा और गेरुआ वस्त्र धारण कर भक्ति एवं उत्साह के साथ गौरीशंकर धाम की ओर प्रस्थान किया। डीजे की भक्तिमय धुनों पर नाचते-गाते बाल कांवरियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। नन्हे कांवरियों के जोश और भक्ति ने राहगीरों एवं ग्रामीणों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यात्रा के दौरान लगातार गूंजते भोलेनाथ के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

*नंगे पांव पूरी की छह किलोमीटर की यात्रा*
बाल बम कांवरियों ने कठिन पदयात्रा के बावजूद पूरे उत्साह के साथ करीब छह किलोमीटर का रास्ता नंगे पांव तय किया। गेरुआ वस्त्रों में सजे कांवरियों के चेहरों पर भक्ति, उमंग और उत्साह साफ झलक रहा था। गौरीशंकर धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

*ग्रामीणों ने की कांवरियों की सेवा*
बाल कांवरियों की सेवा के लिए क्षेत्र के उत्साही ग्रामीणों ने यात्रा मार्ग में जगह-जगह नाश्ता, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। ग्रामीणों द्वारा की गई सेवा से कांवरियों को काफी राहत मिली। सेवा भाव और श्रद्धालुओं की भक्ति ने पूरे क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द एवं उत्सव का माहौल बना दिया।

*वर्षों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन*
बताया जाता है कि शाहगंज कस्बे एवं आसपास के क्षेत्रों के बाल बम कांवरियों द्वारा कई वर्षों से सावन मास में महामाया से जल भरकर गौरीशंकर धाम पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी बाल कांवरियों ने पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
*सावन के पावन सोमवार पर बाल कांवरियों की भक्ति, भोलेनाथ के जयकारे और ग्रामीणों की सेवा भावना ने गौरीशंकर धाम को पूरी तरह शिवमय कर दिया।*


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