*पीएम आवास की एससी सूची में खेल,अन्य वर्गों के नाम शामिल होने से मचा हड़कंप*

*पीएम आवास की एससी सूची में खेल,अन्य वर्गों के नाम शामिल होने से मचा हड़कंप*
•~ ढुटेर में पीएम आवास की सूची पर उठे सवाल, एससी के हक पर सेंधमारी, सूची में हेराफेरी बनी विवाद का कारण
~ एससी वर्ग के हकदारों ने बुलंद की आवाज,बीडीओ से निष्पक्ष जांच की मांग

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

सोनभद्र। सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गरीब और पात्र परिवारों को पक्की छत मुहैया कराने की कवायद चल रही है। वहीं घोरावल विकासखंड के ग्राम पंचायत ढुटेर में आवास योजना की अनुसूचित जाति श्रेणी की सूची को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एससी श्रेणी की सूची में अन्य जातियों के लोगों के नाम वरीयता क्रम में दर्ज कर दिए गए हैं। इससे वास्तविक अनुसूचित जाति के पात्र लाभार्थियों को योजना के लाभ से वंचित होने की आशंका जताई जा रही है।
ग्राम पंचायत ढुटेर निवासी विजेंद्र, चंदन, संदीप एवं राकेश ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से खंड विकास अधिकारी, घोरावल को शिकायत भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की अनुसूचित जाति की सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो उनके अनुसार इस श्रेणी में नहीं आते हैं।ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित सूची का निष्पक्ष एवं अभिलेखीय सत्यापन कराया जाए और पात्रता की जांच के बाद अनुसूचित जाति की सूची में केवल वास्तविक पात्र लाभार्थियों को ही शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यदि सूची में अनियमितता पाई जाती है तो उसे तत्काल दुरुस्त कर वास्तविक पात्र अनुसूचित जाति परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए, ताकि गरीब और वंचित परिवारों को पक्की छत मिल सके।
*पहले भी उठ चुके हैं सवाल*
ग्रामीणों ने दावा किया है कि पिछली बार भी मामला सामने आया था।शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इससे पहले भी ग्राम पंचायत ढुटेर में अनुसूचित जाति के पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने में इसी तरह की समस्या सामने आई थी। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत के बाद जांच में जिम्मेदारों की गलती सामने आई थी और कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन बाद में मामला आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं और जरूरत पड़ने पर मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।
*सूची में नामों का खेल आखिर कैसे?*
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि अनुसूचित जाति की सूची में पात्रता से इतर नाम दर्ज हुए हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और प्रक्रिया में यह स्थिति कैसे बनी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही पात्र लाभार्थियों के अधिकार भी सुरक्षित हो सकेंगे।निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच।हो सकेगा दूध का दूध और पानी का पानी। ग्रामीणों ने अभिलंब कार्रवाई की मांग की है।


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