
*‘बंदूक-तोप छोड़ इंसानियत की बात करो’, कवियों ने पूरी रात बांधा समां*
*‘बंदूक-तोप छोड़ इंसानियत की बात करो’, कवियों ने पूरी रात बांधा समां*
•~ मधुपुर में मां मंगला गौरी दुर्गा पूजन समिति के आयोजन में उमड़ा काव्य प्रेमियों का हुजूम, वीर रस, हास्य-व्यंग्य और कौमी एकता की रचनाओं से गूंजा पंडाल
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता सेराज अहमद /अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। मां मंगला गौरी दुर्गा पूजन समिति, मधुपुर के तत्वावधान में जनकल्याण की भावना से रविवार की रात विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पहली बार आयोजित इस कवि सम्मेलन में सैकड़ों श्रोताओं की मौजूदगी और पूरी रात काव्य पाठ के प्रति लोगों का उत्साह देखते ही बना। नव प्रवाह साहित्यिक मंच, सोनभद्र के संयोजन में सजे इस साहित्यिक मंच पर कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, संवेदनशील, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सम्मेलन भोर तक चलता रहा और श्रोता तालियों के साथ कवियों का उत्साह बढ़ाते रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री एवं शिक्षिका दिव्या राय ने मां सरस्वती की वंदना ‘अर्चना करती हूं, प्यार दे मां शारदे’ से किया। इसके बाद काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पूरी रात श्रोताओं को बांधे रखा।
*‘रहें मिलजुल के सभी, आदमी बनकर’ का दिया संदेश*
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शहीद स्थल करारी के प्रमुख प्रद्युम्न त्रिपाठी ने अपनी पंक्तियों ‘बंदूक, तोप, खंजर की बात मत करिये, खूनी मंजर की बात मत करिये। रहें मिलजुल के सभी आदमी बनकर, बहार खिलती रहे, बंजर की बात मत करिये’ के माध्यम से आपसी भाईचारे, शांति और मानवीय संवेदनाओं का संदेश दिया। उनकी रचना ने श्रोताओं को सामाजिक सौहार्द और इंसानियत पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।सम्मेलन का सफल संचालन कर रहे वाराणसी से आए नाथ सोनांचली ने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों ‘हम अपने हाथ में जब भी कलम उठाते हैं, तो हाकिमों के कलेजे भी कांप जाते हैं’ से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी प्रस्तुति ने साहित्य की ताकत और कलम की धार का प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत किया।
*हास्य-व्यंग्य से गूंजा पंडाल, सामाजिक विसंगतियों पर भी हुए प्रहार*
कवयित्री दिव्या राय ने नारी सशक्तीकरण पर आधारित रचना ‘मत रोक सांवरिया, घूंघट में मुझे, नील गगन तक जाने दे’ सुनाकर महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके सपनों को स्वर दिया। वहीं चंदौली से आए कवि बंधू पाल ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना ‘का बतलाईं हे भैया, घरवां वाली परधान हो गईल’ सुनाकर श्रोताओं को देर तक हंसाया।नव प्रवाह साहित्यिक मंच, सोनभद्र के अध्यक्ष एवं शिक्षक गोपाल कुशवाहा ने ‘आग पानी में लगाते हैं लगाने वाले, चैन से यार रहेंगे न जमाने वाले’ जैसी पंक्तियों से सामाजिक संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। मिर्जापुर से आए हास्य-व्यंग्य कवि नर सिंह साहसी ने फिल्मी पैरोडी और समसामयिक कटाक्ष के जरिए महफिल में रंग जमाया। उनकी रचना ‘ज्ञान गंगा में गोता लगाव करा, आग सगी लगल बा बुझावल करा’ पर पंडाल तालियों से गूंज उठा।कवि दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ ने अपनी रचना ‘शान, शोहरत, दंभ और पाखंड के कचरे तले, आदमी भी है कहें तो बेईमानी हो गई’ के माध्यम से इंसानियत के गिरते मूल्यों पर चोट की और मानवीय संवेदनाओं की वकालत की।
*कविताओं में छलकी आम आदमी की पीड़ा, कौमी एकता का गूंजा संदेश*
वाराणसी से आए प्रवक्ता डॉ. छोटेलाल ‘मनमीत’ ने ‘बुझते हुए चराग की तुम रोशनी बनो’ सुनाकर आम आदमी की पीड़ा, रुदन और संघर्ष को शब्द दिए। उनकी संवेदनशील प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।शायर अशोक तिवारी ने अपनी पंक्तियों ‘न तेरा है, न मेरा है, ए हिंदुस्तान सबका है, नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका है’ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। उनकी रचना ने साझा विरासत और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती से प्रस्तुत किया।शिक्षक राधेश्याम पाल ‘श्याम’ ने सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए सवाल उठाया—‘लगा के कुंभ में डुबकी भला हो जाएगा क्या, पड़ा जो पाप का धब्बा, साफ हो जाएगा क्या?’ उनकी रचना ने बाहरी आडंबर के बजाय आचरण और आत्मचिंतन के महत्व को रेखांकित किया।वहीं प्रमोद कुमार निर्मल ने वीर रस से ओतप्रोत रचना ‘वतन खातिर हथेली पर मैं अपनी जान रखता हूं’ सुनाकर श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान जय हिंद और वंदे मातरम के उद्घोष से पूरा वातावरण देशप्रेम के रंग में रंग गया।
*भोर तक जमे रहे श्रोता, आयोजकों ने किया कवियों का उत्साहवर्धन*
कवि सम्मेलन में सभी वर्गों, समुदायों और सामाजिक पृष्ठभूमि के सैकड़ों लोगों की सहभागिता रही। देर रात से भोर तक श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं का आनंद लिया और तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। आयोजन ने साहित्य, सामाजिक समरसता, देशभक्ति और मानवीय मूल्यों को एक मंच पर प्रस्तुत किया।इस अवसर पर मां मंगला गौरी दुर्गा पूजन समिति के सदस्य भगवान दास यादव, रवि सेठ, राजू चौरसिया, राजेश, सतीश जायसवाल, विकास, मृत्युंजय, अनिल चौरसिया और फारुक अली ने कवियों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य चुर्क मोहन कुशवाहा, जिला पंचायत सदस्य मधुपुर उषा देवी, अजीत कुमार, मनोज कुशवाहा, मझुई एवं मधुपुर के ग्राम प्रधान, नवीन मौर्य, प्रवीण, कृधा केयर के निदेशक डॉ. विशेश्वर चौहान सहित दिनेश, अरविंद, प्रदीप, सुरेश, प्रीतम और कमलेश समेत अनेक गणमान्य लोग पूरी रात मौजूद रहे।











