
*मारकुंडी घाटी में दंपति की मौत के मामले में कोर्ट सख्त, चार लोगों पर एफआईआर का आदेश*
*मारकुंडी घाटी में दंपति की मौत के मामले में कोर्ट सख्त, चार लोगों पर एफआईआर का आदेश*
•~ करीब तीन माह पुराने मामले में सीजेएम अदालत का निर्देश, एक सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। मारकुंडी घाटी में करीब तीन माह पूर्व पति-पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) पंकज की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चोपन थानाध्यक्ष को मामले में दंपति समेत चार लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने अथवा कराने तथा एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है। यह आदेश रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र के तिरनाही गांव निवासी बुल्लू यादव की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रोशन लाल यादव के माध्यम से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया।
*शादी के दो महीने बाद घाटी में मिले थे शव*
प्रार्थना पत्र के अनुसार, बुल्लू यादव के इकलौते पुत्र राहुल यादव की शादी 6 मई 2026 को सलखन के बरवा टोला निवासी बबुन्दर यादव की पुत्री इंद्रावती उर्फ इंदु उर्फ चंदा से हुई थी। आरोप है कि चंदा शादी से पहले करीब पांच वर्ष तक डॉ. राम भरोसे उर्फ राजबीर के निजी अस्पताल में नर्स के रूप में काम करती थी। बाद में वह रॉबर्ट्सगंज स्थित दूसरे अस्पताल में नौकरी करने लगी। शादी के बाद वह महज दस दिन ही ससुराल में रही। इसके बाद वह सलखन से अस्पताल आती-जाती थी और राहुल उसे बाइक से छोड़ने जाता था।
*धमकी मिलने का भी लगाया आरोप*
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि घटना से कुछ दिन पहले राहुल को चंदा पर अधिक निगरानी रखने को लेकर धमकी मिली थी। राहुल ने इस बात की जानकारी अपनी मां को भी दी थी। आरोप है कि चंदा के साथ शादी करने से पहले भी कुछ लोगों ने राहुल को धमकाया था। प्रार्थी ने विकास सिंह पटेल, डॉ. राम भरोसे उर्फ राजबीर तथा बबलू यादव और उसकी पत्नी सविता यादव पर धमकी देने सहित गंभीर आरोप लगाए हैं।
*घटना के बाद पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप*
बुल्लू यादव के मुताबिक, 8 जुलाई 2026 को राहुल अपनी पत्नी चंदा से मिलने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। इसके बाद 12 जुलाई को जानकारी मिली कि राहुल और चंदा के शव मारकुंडी घाटी में मिले हैं। प्रार्थना पत्र में घटनास्थल पर बाइक सुरक्षित मिलने और दोनों शवों को जलाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। प्रार्थी ने मामले में हत्या की आशंका जताते हुए संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।आरोप है कि घटना की सूचना चोपन थाने में देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई, लेकिन वहां से भी कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
*अदालत ने विवेचना को आवश्यक माना*
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रोशन लाल यादव ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। पत्रावली के अवलोकन और अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए पुलिस विवेचना आवश्यक समझी। इसके बाद प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए चोपन थानाध्यक्ष को संबंधित चार लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने अथवा कराने और एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया।फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोप प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों पर आधारित हैं। उनकी पुष्टि पुलिस विवेचना के बाद ही हो सकेगी।











