गाटे का अंश निर्धारण प्रक्रिया शुरू 

गाटे का अंश निर्धारण प्रक्रिया शुरू 

किसान अपने क्षेत्रीय लेखपाल से मिलकर अपने संबंधित खाते एवं गाटे का अंश निर्धारण करा लें -एस डी एम 

सोनभद्र( विनोद मिश्रा /सेराज अहमद )
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता- 2006, 11 फरवरी 2016 से लागू की गई। इस राजस्व संहिता में खतौनी के अंदर एक 14 स्तंभ जोड़ा गया जिसमें अंश निर्धारण की प्रक्रिया भी समाहित की गई। अंश निर्धारण का आशय किसी खाते के किसी गाटा में से खातेदारों के पास कितना-कितना क्षेत्रफल है इसका निर्धारण किया जाता है। इसके निर्धारण होने से बैंक से लोन लेते समय तहसील से पृथक से हिस्सा प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करना पड़ता है साथ ही बैनामा करते समय कृषक को अपना हिस्सा बेचने में स्पष्टता रहती है। अपने हिस्से से अधिक कोई भी कृषक बैनामा नहीं कर सकता है। इससे भूमि विवाद भी उत्पन्न नहीं होते हैं।किसी भी कृषक के हिस्से को उसके क्षेत्रफल एवं भिन्न के रूप में खतौनी में दर्शाया जाता है। अंश निर्धारण के कार्य को राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देशन के क्रम में अभियान के तहत किया जा रहा है। तहसील घोरावल में अब तक कुल 82% गाटो का अंश निर्धारण किया जा चुका है। अंश निर्धारण न हो पाने की दशा में खतौनी पर विभिन्न आदेश का अनुपालन नहीं हो पाता है। जिन कृषकों का अंश निर्धारण नहीं होता है उनके कई कार्य खतौनी में दर्ज नहीं हो पाते हैं इसलिए सभी कृषक बंधुओं से अनुरोध किया जाता है कि वह अपने छेत्रीय लेखपाल से मिलकर अपने संबंधित खाते एवं गाटे का अंश निर्धारण करा लें l


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