
*गुरमुरा में नेत्र शिविर का महाअभियान, 230 लोगों की जांच; 38 मरीजों का होगा निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन*
*गुरमुरा में नेत्र शिविर का महाअभियान, 230 लोगों की जांच; 38 मरीजों का होगा निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन*
•~ आरजे शंकरा आई हॉस्पिटल और पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा की पहल से जरूरतमंदों को मिली नेत्र चिकित्सा की सौगात
•~जरूरतमंदों की आंखों में रोशनी लौटाने की पहल,अक्टूबर माह में अब तक 1,000 लोगों की आंखों की जांच, 200 मरीजों का सफल ऑपरेशन
*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*
गुरमा-सोनभद्र। गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रविवार को चोपन ब्लॉक के गुरमुरा ग्राम स्थित पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय परिसर में निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। आरजे शंकरा आई हॉस्पिटल और पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा के सौजन्य से आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई। शिविर के माध्यम से जरूरतमंदों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के साथ ही मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा भी प्रदान की गई।शिविर में कुल 230 लोगों का नेत्र परीक्षण किया गया। कुशल चिकित्सकों की टीम ने जांच के बाद इनमें से 38 लोगों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए पात्र पाया। इन सभी मरीजों को निःशुल्क बस से वाराणसी भेजा गया, जहां उनका ऑपरेशन कराया जाएगा। वहीं, जांच के बाद चश्मे की आवश्यकता वाले अन्य लोगों को निःशुल्क चश्मे भी प्रदान किए गए।
*नेत्र ज्योति लौटाने की दिशा में सराहनीय पहल*
ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस शिविर से उन लोगों को विशेष लाभ मिला, जिन्हें आर्थिक कठिनाइयों अथवा अन्य कारणों से आंखों का उपचार कराने में परेशानी होती है। निःशुल्क जांच, चश्मा वितरण और ऑपरेशन की व्यवस्था ने जरूरतमंदों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का रास्ता आसान किया।
आयोजकों के अनुसार, अक्टूबर माह में अब तक इस अभियान के तहत कुल 1,000 लोगों की आंखों की जांच की जा चुकी है, जबकि 200 लोगों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया जा चुका है। यह पहल ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों को नेत्र चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से लोगों को आंखों की बीमारियों के प्रति जागरूक करने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे शिविरों से जरूरतमंदों को राहत मिलने के साथ ही उनके जीवन में फिर से रोशनी लौटने की उम्मीद भी मजबूत होती है।











