*खनन विभाग की कथित दोहरी नीति से जनता बेहाल, मारकुंडी घाटी से टोल प्लाजा तक जाम का तांडव!*

*खनन विभाग की कथित दोहरी नीति से जनता बेहाल, मारकुंडी घाटी से टोल प्लाजा तक जाम का तांडव!*
•~ ओवरलोडिंग के नाम पर वाहनों के चालान, लेकिन क्रेशर प्लांटों और बालू खदानों पर लोडिंग के मानक तय करने की मांग अनसुनी!

*इंडिया न्यूज़ लाइव टीवी संवाददाता अवधेश कुमार गुप्ता*

गुरमा-सोनभद्र।वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य राजमार्ग पर मारकुंडी घाटी से इंको प्वाइंट टोल प्लाजा तक भारी वाहनों की लंबी कतारें आमजन के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। मध्यरात्रि से शुरू होने वाला जाम सुबह तक राहगीरों के लिए सिरदर्द बना रहता है। छोटे वाहनों से लेकर रोडवेज और निजी बसों तक की रफ्तार थम जाती है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है, जब जाम के बीच एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के आवागमन में भी बाधा आने की आशंका बनी रहती है। आए दिन की इस अव्यवस्था ने राजमार्ग पर सफर करने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके बावजूद जाम की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर ठोस पहल होती दिखाई नहीं दे रही है।
*ओवरलोडिंग पर कार्रवाई, लेकिन लोडिंग के मानक पर चुप्पी क्यों?*
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ वाहन स्वामियों ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारी ओवरलोडिंग की जांच के नाम पर वाहनों का चालान कर रहे हैं, लेकिन क्रेशर प्लांटों और बालू खदानों पर लोडिंग की स्पष्ट एवं निर्धारित सीमा तय करने की मांग पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।वाहन स्वामियों का सवाल है कि यदि ओवरलोडिंग रोकना विभाग की प्राथमिकता है, तो फिर लोडिंग के स्थानों पर ही निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन क्यों नहीं सुनिश्चित कराया जाता? उनका कहना है कि नियमों की स्पष्टता और एकसमान अनुपालन के अभाव में वाहन संचालकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में केवल सड़क पर जांच और चालान की कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान कैसे संभव होगा l


*विभागीय कार्रवाई के बीच पिस रही आम जनता*
वाहन स्वामियों के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल आम जनता की परेशानी का है। भारी वाहनों की कतारों के कारण राजमार्ग पर आवागमन बाधित होने से यात्रियों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। नौकरी, कारोबार, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों से निकलने वाले लोगों को जाम में फंसकर परेशान होना पड़ता है। बसों में सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ जाती हैं।यदि भारी वाहनों की आवाजाही और खनन संबंधी कार्रवाई के बीच समुचित समन्वय नहीं होगा, तो इसका असर सीधे सड़क यातायात पर पड़ेगा। ऐसे में संबंधित विभागों को केवल चालान की संख्या तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय जाम के कारणों की पहचान कर प्रभावी समाधान तलाशना होगा।
*एंबुलेंस फंसी तो कौन होगा जिम्मेदार?*
मारकुंडी घाटी से इंको प्वाइंट टोल प्लाजा तक लगने वाले जाम का सबसे संवेदनशील पहलू आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा है। जाम के कारण यदि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी होती है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखना केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जनहित और आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही का भी विषय है।

*लोडिंग स्थलों पर मानक तय हों, तभी निकलेगा स्थायी समाधान*
वाहन स्वामियों ने मांग की है कि क्रेशर प्लांटों और बालू खदानों पर वाहनों की लोडिंग के स्पष्ट मानक निर्धारित किए जाएं तथा नियमों का समान रूप से पालन कराया जाए। साथ ही, जाम के संभावित कारणों की निष्पक्ष जांच कर यातायात सुचारु रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।अब सवाल यह है कि खनन विभाग की कार्रवाई केवल सड़क पर वाहनों की जांच और चालान तक सीमित रहेगी या लोडिंग स्थलों पर भी नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा? आखिर मारकुंडी घाटी से टोल प्लाजा तक जाम की समस्या से आम जनता को राहत कब मिलेगी?जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मामले का तत्काल संज्ञान लें, लोडिंग व्यवस्था की जांच कराएं और यातायात बाधित होने के कारणों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो और आम जनता को रोजाना की परेशानी से निजात भी मिल सके।


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